नेशनल डेस्क: देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों को बढ़ाने से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के संकेत मिल रहे हैं। संसद के विस्तारित सत्र की शुरुआत गुरुवार से हो रही है, जिसमें केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी में है। वहीं कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दल इस कदम का विरोध कर रहे हैं।
सरकार ने इस प्रस्ताव को महिला आरक्षण से भी जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही महिला आरक्षण को एक बड़ा मुद्दा बना चुके हैं, ऐसे में विपक्ष खुलकर इसका विरोध करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन परिसीमन को लेकर विपक्ष अपनी आपत्तियों पर कायम है।
पहले दिन ही पेश होगा बड़ा विधेयक
संसद के बजट सत्र के तीन दिन के इस विस्तारित चरण के पहले दिन ही सरकार लोकसभा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पेश करेगी, जिसका मकसद लोकसभा और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाना है। इसी विधेयक में महिला आरक्षण का प्रावधान भी शामिल होगा। इसके साथ ही परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए जाएंगे।
दक्षिण राज्यों की चिंता और सरकार का जवाब
दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को आशंका है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, इसलिए नए परिसीमन में उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं की जाएंगी।
सरकार का कहना है कि सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाएगी। लोकसभा की अधिकतम सीट संख्या 850 तय की गई है और इसे इससे ज्यादा नहीं बढ़ाया जाएगा।
क्यों जरूरी है परिसीमन
सरकार का तर्क है कि साल 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए वर्तमान स्थिति के अनुसार नया परिसीमन जरूरी हो गया है। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी। हर राज्य के लिए अलग-अलग परिसीमन आयोग बनाए जाएंगे, जो सभी राजनीतिक दलों से बातचीत के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेंगे।
संसद में तीन दिन का कार्यक्रम
16 अप्रैल को लोकसभा में तीनों विधेयकों पर चर्चा होगी, जिसके लिए करीब 18 घंटे का समय तय किया गया है। 17 अप्रैल को लोकसभा में मतदान के बाद विधेयकों को पारित किया जाएगा और 18 अप्रैल को इसके बाद विधेयकों को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां करीब 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा।
ये प्रमुख विधेयक होंगे पेश
संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026
परिसीमन विधेयक, 2026
संघ शासित क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
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