Last Updated: September 22, 2026

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Tourists को लगा बड़ा झटका, अब उत्तराखंड जाने पर देना होगा ‘ग्रीन सेस’

October 26, 2025

Tourists को लगा बड़ा झटका, अब उत्तराखंड जाने पर देना होगा ‘ग्रीन सेस’

नेशनल डेस्क: अगर आप दिल्ली या किसी अन्य राज्य से दिसंबर में उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए यह खबर जरूरी है। अब दिसंबर 2025 से उत्तराखंड में बाहर के राज्यों से आने वाले वाहनों को ग्रीन सेस (Green Cess) देना होगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है यानी जैसे ही आपका वाहन उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करेगा, वैसे ही यह शुल्क अपने आप कट जाएगा।

कैसे कटेगा ग्रीन सेस?

परिवहन विभाग के अपर आयुक्त एस.के. सिंह ने बताया कि बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली फास्टैग (FASTag) के जरिए की जाएगी। वाहनों पर लगे फास्टैग से यह शुल्क अपने आप कट जाएगा। इसके लिए अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए राज्य की सीमाओं पर 16 जगहों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर पहचान करेंगे और फास्टैग से सेस काटेंगे।

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राज्य को होगा कितना फायदा?

सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से हर साल करीब 100 से 150 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। ग्रीन सेस वसूली की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए सरकार ने एक निजी कंपनी के साथ करार किया है। ANPR कैमरे गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की सीमाओं पर लगाए जा रहे हैं, जिनमें कुल्हाल, आशारोड़ी, नारसन, चिड़ियापुर, खटीमा, काशीपुर, जसपुर और रुद्रपुर जैसे प्रमुख बॉर्डर पॉइंट शामिल हैं।

कौन से वाहन देंगे ग्रीन सेस?

विभाग ने अलग-अलग वाहनों के लिए सेस की दरें तय की हैं, जिनमें कार के लिए ₹80, डिलीवरी वैन के लिए ₹250, हेवी व्हीकल के लिए ₹120 प्रतिदिन, बस के लिए ₹140 और ट्रक के आकार के अनुसार ₹140 से ₹700 तक तय किए गए हैं।

किन वाहनों को मिलेगी छूट?

कुछ वाहनों को इस सेस से पूरी तरह मुक्त रखा गया है, जिनमें दोपहिया वाहन (स्कूटी, बाइक आदि), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), CNG वाहन, सरकारी गाड़ियां, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा अगर कोई वाहन 24 घंटे के भीतर दोबारा राज्य में प्रवेश करता है, तो उससे दोबारा ग्रीन सेस नहीं लिया जाएगा।

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कहां होगा ग्रीन सेस का इस्तेमाल?

सरकार का कहना है कि ग्रीन सेस से जुटाई गई रकम का उपयोग हवा की गुणवत्ता सुधारने, सड़क सुरक्षा बढ़ाने और शहरी परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाएगा।

बता दें उत्तराखंड सरकार ने साल 2024 में भी ग्रीन सेस लगाने की घोषणा की थी, लेकिन सेस की दरें तय न हो पाने की वजह से इसे टाल दिया गया था। अब सरकार ने दिसंबर 2025 से इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया है।

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