Bhagirath Chaudhary News: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर उनके ही विभाग से करीब 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी लेने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार और मंत्री को घेर रहा है। वहीं, भागीरथ चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें मिली सब्सिडी पूरी तरह सरकारी नियमों और तय प्रक्रिया के तहत दी गई है।
एक खास बातचीत में भागीरथ चौधरी ने कहा कि वह किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में उनकी कृषि भूमि है, जहां पानी की भारी कमी है और भूजल लगभग खत्म हो चुका है। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने अपने खेत में 2 करोड़ लीटर क्षमता का फार्म पॉन्ड (जल संग्रहण तालाब) और आधुनिक पॉलीहाउस का निर्माण कराया, ताकि वर्षा जल का संरक्षण किया जा सके और आधुनिक खेती को बढ़ावा मिले।
सब्सिडी को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि उन्होंने इसके लिए साल 2018 में आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस तैयार होने और उसमें फसल लगने के करीब छह महीने बाद अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण, फोटोग्राफी और सत्यापन किया। इसके बाद वर्ष 2025 में तय नियमों के अनुसार सब्सिडी जारी की गई। उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस परियोजना पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है और इसका लाभ देशभर के हजारों किसान भी लेते हैं। इसलिए इसमें किसी तरह की विशेष रियायत या नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है।
भागीरथ चौधरी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि उनके लंबे राजनीतिक जीवन में आज तक उन पर एक रुपये के भ्रष्टाचार का भी आरोप साबित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके खेत पर एक बड़ा सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिसमें परियोजना की लागत, बैंक लोन और मिली सब्सिडी की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से लिखी गई है। उनके अनुसार, यदि कोई गलत काम किया होता तो वह इसे सार्वजनिक नहीं करते।
मंत्री ने कहा कि वह अपने खेत पर दूसरे किसानों को भी बुलाते हैं, ताकि वे आधुनिक तकनीक से खेती करना सीख सकें। उन्होंने बताया कि उनके पॉलीहाउस में फिलहाल खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस जैसी आधुनिक कृषि परियोजनाएं काफी महंगी होती हैं और बिना सरकारी सहायता के अधिकांश किसानों के लिए इन्हें लगाना आसान नहीं होता। इसी वजह से सरकार किसानों को सब्सिडी देकर आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
विपक्ष का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री ने अपने ही मंत्रालय से बड़ी राशि की सब्सिडी ली है, जबकि मंत्री का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही और उन्हें वही लाभ मिला जो सरकारी योजना के तहत पात्र किसानों को दिया जाता है।