नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरमा ने चिदंबरम को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं, बल्कि ‘पक्का नक्सल’ बताया और उनके गृह मंत्री रहते नक्सलवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों की जांच की मांग की।
यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद शुरू हुआ। लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश में हथियार उठाने वाले नक्सलवाद को काफी हद तक खत्म कर दिया गया है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ यानी नक्सली विचारधारा एक नई चुनौती बनकर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि ऐसी सोच रखने वाले लोग संस्थानों, नीति बनाने वाली जगहों और समाज के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने देशवासियों से ऐसी विचारधारा को पहचानने और उसे अलग-थलग करने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। उनके इसी बयान को लेकर हिमंत बिस्वा सरमा ने उन पर निशाना साधा। सरमा ने कहा कि जब देश के पूर्व गृह मंत्री खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बता रहे हैं, तो यह जांच की जानी चाहिए कि उनके गृह मंत्री रहते नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनका रवैया क्या था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चिदंबरम ने जानबूझकर नक्सलवाद के खिलाफ कोई बड़ा कदम नहीं उठाया था।
असम के मुख्यमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व देश के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहा है और लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने का काम कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के पाठ से जुड़े एक विवाद का भी जिक्र किया। BJP नेताओं ने कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं के आपस में बातचीत करने वाले दृश्यों को लेकर सवाल उठाए और इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ा।
कांग्रेस ने BJP के आरोपों को गलत बताया। पार्टी के मुताबिक, सोनिया गांधी का ध्यान कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ के सही तरीके से गाए जाने पर था। कांग्रेस ने कहा कि उनके व्यवहार का राष्ट्रगीत के अपमान से कोई संबंध नहीं था। इस तरह ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कांग्रेस और BJP के बीच तीखी बयानबाजी में बदल गया है। एक ओर BJP इस मुद्दे को देश की सुरक्षा और विचारधारा से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस प्रधानमंत्री के बयान और BJP के आरोपों का विरोध कर रही है।