नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर के साथ संपर्क में है। प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई होती रहे।
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पीएम मोदी ने लोकसभा में क्या कहा?
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर के साथ भी संपर्क में है। प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई होती रहे। भारत सरकार गल्फ और आसपास के शिपिंग रूट्स पर निरंतर नजर बनाए हुए है। हमारा प्रयास है कि तेल हो, गैस हो या फर्टिलाइजर हो, जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें। हम अपने सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं, ताकि हमारे मैरीटाइम कॉरिडोर सुरक्षित रहें।” उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों के कारण बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से भारत के सामने आई परिस्थितियों पर पीएम मोदी ने कहा, “भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो, देश के सामान्य परिवारों को परेशानी कम से कम हो, इस पर फोकस रहा है।”
कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता
सदन में पीएम मोदी ने कहा कि बीते दशक में संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व है। 65 लाख से अधिक मीट्रिक टन के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। हमारी तेल कंपनियों के पास जो रिजर्व रहता है, वह अलग है। पिछले 11 साल में हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा, “संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी काम आ रही है। पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रैंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक-डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी थी। आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब 4.5 करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है। ऐसे ही रेलवे के बिजलीकरण से फायदा हो रहा है।”

