नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष अब अपनी आवाज मजबूती से उठा रहा है और इसे रोका नहीं जा सकता।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को तब तक राजनीतिक रूप से चुनौती देता रहेगा, जब तक वे अपने पदों से इस्तीफा नहीं दे देते। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के मूल्यों, संस्कृति, भाईचारे और अहिंसा की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना नफरत और हिंसा के अपनी लड़ाई जारी रखेगा। राहुल ने दावा किया कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां लोगों को अपनी बात रखने और अपनी समस्याएं सामने रखने का मौका दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम एशिया और ईरान से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका था। उन्होंने कहा कि ईरान भारत का पुराना दोस्त रहा है, जबकि अमेरिका और रूस के साथ भी भारत के अच्छे संबंध रहे हैं।
राहुल के मुताबिक, भारत इन रिश्तों का इस्तेमाल करके संकट के दौरान मध्यस्थ या प्रभावी भूमिका निभा सकता था, लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की जगह पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने केंद्र सरकार पर विदेश नीति को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
राहुल गांधी ने चीन के साथ सीमा विवाद का मुद्दा उठाते हुए अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पेट्रोलिंग से जुड़े दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इलाकों में भारतीय सैनिकों की पेट्रोलिंग को लेकर समस्याएं पैदा हुई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ऐसी खबरों को मीडिया में सामने आने से रोकने का प्रयास करती है। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप और दावे हैं, जिन पर सरकार का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।
राहुल ने गलवान घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि भारत की जमीन पर किसी ने कब्जा नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के बयानों से चीन के साथ बातचीत में भारत की स्थिति कमजोर हुई। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर कारोबारी हितों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सरकार की नीतियों का फायदा कुछ बड़े उद्योगपतियों को मिल रहा है।
राहुल गांधी ने NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी समस्याएं और नाराजगी सामने रखना चाहते थे, लेकिन सरकार व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के नाम पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही थी। राहुल ने कहा कि उनका मानना है कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात कहने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है, जहां आम लोग बिना डर के अपनी समस्याएं सरकार के सामने रख सकें।
राहुल गांधी ने एक महिला से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उसकी बेटी के साथ चार साल पहले उत्तराखंड में बलात्कार और हत्या हुई थी। राहुल के मुताबिक, महिला अपनी बात रखना चाहती थी, लेकिन उसे लगा कि व्यवस्था उसकी आवाज नहीं सुन रही।उन्होंने इस उदाहरण को छात्रों के प्रदर्शन से जोड़ते हुए कहा कि सरकार का काम लोगों की आवाज सुनना होना चाहिए, न कि उनकी बात रखने पर रोक लगाना।
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS के लोगों को आज के भारत और समाज की पूरी समझ नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए केवल हजारों साल पुराने इतिहास को जानना पर्याप्त नहीं है। आज के भारत, उसकी समस्याओं, लोगों की भावनाओं और समाज में हो रहे बदलावों को समझना भी जरूरी है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष देश के लोगों को अपनी बात कहने का मौका दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और सरकार की नीतियों का विरोध करते रहेंगे।
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