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पश्चिम एशिया हालात पर केंद्र सतर्क, PM मोदी की राज्यों के साथ बड़ी बैठक कल

PM Modi

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और उसके भारत पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की जाएगी।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो देश कैसे तैयार रहे। खासतौर पर तेल और एलपीजी (गैस) की सप्लाई, ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री इस बैठक में “टीम इंडिया” की भावना पर जोर दे सकते हैं, यानी केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करें ताकि किसी भी संकट का बेहतर तरीके से सामना किया जा सके।

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किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

तेल और गैस की सप्लाई कैसे जारी रखी जाए। देश में ऊर्जा की कमी न हो, इसकी तैयारी। विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा। राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल। जिन राज्यों में इस समय चुनाव चल रहे हैं, वे आचार संहिता के कारण इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। ऐसे राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक की जाएगी, ताकि तैयारियां जारी रहें।

एलपीजी और तेल को लेकर चिंता क्यों?

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की वजह से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते पर असर पड़ने की आशंका है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। हालांकि, भारत के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि इस रास्ते पर पूरी तरह रोक नहीं लगी है। फिर भी भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि घबराने की जरूरत नहीं है। देश के पास लगभग 60 दिनों का ईंधन स्टॉक मौजूद है। अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई पहले ही तय कर ली गई है। भारत 40 से ज्यादा देशों से तेल खरीदता है, जिससे किसी एक जगह पर निर्भरता कम रहती है।सरकारी तेल कंपनियों ने पहले से तैयारी कर रखी है।

सरकार ने यह भी कहा है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि फिलहाल देश में ऊर्जा की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है। कुल मिलाकर, यह बैठक इसलिए अहम है ताकि किसी भी संभावित संकट से पहले ही तैयारी मजबूत की जा सके और देश में किसी तरह की कमी या घबराहट न हो।

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