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‘भारत की विदेश नीति कमजोर दिख रही’, अमेरिका की 30 दिन की छूट पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला

'If Trump says so, Modi will jump', Rahul Gandhi's scathing attack on PM Modi

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत की विदेश नीति ऐसी लग रही है जैसे “समझौता किए हुए व्यक्ति का शोषण किया जा रहा हो।”

राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने की घोषणा की है। यह छूट ऐसे समय में दी गई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले समुद्री रास्तों में रुकावट आने लगी है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है।

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क्या कहा राहुल गांधी ने

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत की विदेश नीति देश के इतिहास, भूगोल और उसके मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति में सत्य, अहिंसा और देश की जनता की सामूहिक इच्छा की झलक होनी चाहिए। लेकिन फिलहाल जो स्थिति दिख रही है, वह सही नीति नहीं है बल्कि कमजोर स्थिति का फायदा उठाया जाना है।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा “30 दिन की छूट” देने की भाषा नियो-इंपीरियल (नई तरह के साम्राज्यवादी) रवैये को दिखाती है। तिवारी ने सवाल उठाया कि क्या भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए अमेरिका से अनुमति लेनी पड़ेगी? उन्होंने कहा कि भारत कोई “बनाना रिपब्लिक” नहीं है कि उसे अपने ऊर्जा स्रोत तय करने के लिए किसी दूसरे देश से अनुमति लेनी पड़े।

केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल

मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो सरकार आम तौर पर हर मुद्दे पर बोलती है, उसकी इस मामले में चुप्पी बहुत कुछ बताती है। उनका कहना है कि सरकार को देश की संप्रभुता (Sovereignty) का मतलब समझना चाहिए और इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

अमेरिका ने क्या कहा

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे और ऊर्जा संकट न बढ़े। अमेरिका ने यह भी उम्मीद जताई है कि इस अस्थायी व्यवस्था के बाद भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर

हाल ही में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई अहम लोग मारे गए बताए जा रहे हैं।इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइली ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। इस कारण खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ गई है और तेल व गैस की सप्लाई पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर

भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत तेल खाड़ी देशों से आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। अगर इस रास्ते में रुकावट आती है तो भारत की कई इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती हैं। खासकर, सिरेमिक उद्योग और खाद (फर्टिलाइज़र) उद्योग… क्योंकि ये उद्योग खाड़ी देशों से आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर काफी हद तक निर्भर हैं।

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