Last Updated: November 7, 2026

Dainik Savera Times Logo

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले को चुनौती देगा यूनियन बैंक, NCLAT में दायर करेगा अपील

August 29, 2026

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले को चुनौती देगा यूनियन बैंक, NCLAT में दायर करेगा अपील

मुंबई: सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवाला मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा स्वीकृत समाधान योजना को चुनौती देने का फैसला किया है। बैंक ने शनिवार को कहा कि वह इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) का दरवाजा खटखटाएगा। सुभाष चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की याचिका पर शुरू हुई थी। इस मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस सहित कई प्रमुख ऋणदाताओं ने समाधान योजना का विरोध किया था और एनसीएलटी से इसे मंजूरी नहीं देने का अनुरोध किया था।

यूनियन बैंक ने अपने बयान में कहा कि उसकी ब्रिटेन स्थित इकाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड सहित अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाताओं ने समाधान योजना के खिलाफ मतदान किया था। बैंक का तर्क था कि प्रस्तावित योजना में ऋणदाताओं के हितों का पर्याप्त संरक्षण नहीं किया गया है। हालांकि, कुछ निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं के बहुमत समर्थन के कारण यह योजना आवश्यक मतदान सीमा हासिल करने में सफल रही और एनसीएलटी ने इसे मंजूरी दे दी। बैंक ने कहा कि इसी वजह से अब वह इस फैसले को एनसीएलएटी में चुनौती देगा।

यूनियन बैंक ने कहा, “इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा दायर व्यक्तिगत दिवाला मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड, केनरा बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने समाधान योजना को अस्वीकार किया था और एनसीएलटी के समक्ष इसके मंजूरी का विरोध किया था। लेकिन कुछ निजी ऋणदाताओं के बहुमत समर्थन के कारण योजना को मंजूरी मिल गई। अब यूनियन बैंक इस निर्णय को तत्काल एनसीएलएटी में चुनौती देगा।” यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एचडीएफसी बैंक भी इसी आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की संभावना तलाश रहा है। एचडीएफसी बैंक ने हाल ही में कहा था कि उसके लगभग 680 करोड़ रुपए के दावे में से केवल 3.2 प्रतिशत राशि को ही स्वीकार किया गया था और वह भी इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

एनसीएलटी के इस फैसले ने बैंकिंग और वित्तीय जगत का व्यापक ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि स्वीकृत समाधान योजना में ऋणदाताओं को अपने दावों का बहुत छोटा हिस्सा ही मिलने की संभावना है। इसी कारण कई ऋणदाता इस योजना को अत्यधिक नुकसानदायक मान रहे हैं। दूसरी ओर, सुभाष चंद्रा ने मामले को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से संबंधित ऋण नहीं लिए थे। उनका कहना है कि उन्होंने केवल एस्सेल ग्रुप से जुड़ी उधार लेने वाली कंपनियों के लिए व्यक्तिगत गारंटर के रूप में भूमिका निभाई थी।चंद्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया में व्यापक रूप से उद्धृत 22,006 करोड़ रुपए का आंकड़ा दिवाला कार्यवाही में दाखिल कुल दावों का प्रतिनिधित्व करता है। उनके अनुसार, इसे वर्तमान देय राशि या अंतिम वित्तीय दायित्व के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें