कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। फिलहाल वे दिल्ली में मौजूद हैं। उनके इस्तीफे की आधिकारिक वजह अभी तक सामने नहीं आई है। न तो राजभवन और न ही केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में कोई विस्तृत बयान जारी किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल का पद छोड़ना एक अहम घटनाक्रम है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
अपने कार्यकाल के दौरान राज्यपाल सीवी आनंद बोस और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आए थे। विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति, विभिन्न विधेयकों पर हस्ताक्षर और प्रशासनिक फैसलों को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई बार विवाद की स्थिति बनी थी। इन मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी भी देखने को मिली थी।
संवैधानिक नियमों के अनुसार, राज्यपाल का इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जाता है। राष्ट्रपति के इस्तीफा स्वीकार करने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति की जाती है। तब तक किसी अन्य राज्य के राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार भी दिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन की ओर से इस मामले में जल्द आधिकारिक जानकारी जारी की जा सकती है।
सीवी आनंद बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह मेघालय सरकार के सलाहकार भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह एक लेखक, वक्ता और आवास नीति के विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति, भारत सरकार में सचिव और मुख्य सचिव जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया है।
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