पंजाब डेस्क: चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से पांच नए कानून लागू किए हैं। इन नियमों का असर सीधे तौर पर आम लोगों, मकान मालिकों, कारोबारियों और संस्थानों पर देखने को मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि नए प्रावधानों से पारदर्शिता बढ़ेगी और कानूनी प्रक्रियाएं पहले से अधिक व्यवस्थित होंगी।
फायर NOC को लेकर बड़ी राहत
नए नियमों के तहत अब फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की वैधता अवधि एक साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। इसका फायदा होटल, स्कूल, अस्पताल, फैक्टरी और ऊंची इमारतों को मिलेगा, जिन्हें हर साल नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। हालांकि, सभी संस्थानों को फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
अवैध इमिग्रेशन कारोबार पर सख्ती
चंडीगढ़ प्रशासन ने बिना लाइसेंस इमिग्रेशन और वीजा सेवाएं चलाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। नए कानून के अनुसार फर्जी या अवैध तरीके से इमिग्रेशन कारोबार करने वालों को 3 से 5 साल तक की सजा हो सकती है। प्रशासन का मानना है कि इससे ट्रैवल एजेंटों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।
रेंट एग्रीमेंट अब जरूरी
अब शहर में किराए पर मकान देने और लेने के लिए रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य होगा। प्रशासन के अनुसार इससे मकान मालिक और किरायेदारों के बीच होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किरायेदारी प्रक्रिया कानूनी रूप से अधिक पारदर्शी बनेगी।
लाल लकीर क्षेत्र की संपत्तियों को मिलेगा रिकॉर्ड
प्रशासन ने लाल लकीर के अंदर आने वाले रिहायशी क्षेत्रों की संपत्तियों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करने का फैसला भी लिया है। इसके तहत लंबे समय से रह रहे लोगों को मालिकाना अधिकार देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे हजारों परिवारों को कानूनी पहचान और संपत्ति संबंधी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
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आम लोगों पर क्या होगा असर?
इन नए कानूनों के लागू होने से शहर में सुरक्षा, पारदर्शिता और कानूनी व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। किरायेदारी से लेकर कारोबार और संपत्ति अधिकार तक कई क्षेत्रों में अब नियम पहले से ज्यादा सख्त और व्यवस्थित हो जाएंगे।

