पंजाब डेस्क: तरनतारन जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। प्रशासन की टीम ने गांव जोहल ढाए में खेत में लगाई गई पराली की आग को मौके पर पहुंचकर बुझाया। इस मामले में संबंधित किसान के खिलाफ चालान भी काटा गया है। अब किसान को निर्धारित नियमों के अनुसार जुर्माना भरना होगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई से साफ है कि पराली जलाने वालों के खिलाफ अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों को लगातार जागरूक करने के साथ-साथ खेतों में निगरानी भी की जा रही है।
जोहल ढाए में पराली जलाने पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, गांव जोहल ढाए में किसान भूपिंदर सिंह पुत्र हरबंस सिंह द्वारा खेत में पराली को आग लगाई गई थी। इसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।
इसके बाद संबंधित किसान का चालान काटकर नियमानुसार जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने की घटनाओं को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
डिप्टी कमिश्नर के निर्देश पर कई गांवों में निरीक्षण
डिप्टी कमिश्नर राहुल के निर्देशों के तहत सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) खडूर साहिब संजीव कुमार शर्मा और डॉ. यादविंदर सिंह ने विभिन्न गांवों का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने खेतों में पराली प्रबंधन की स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान खडूर साहिब, फतेहाबाद, खेला, भैल, भोइयां, भैल ढाए वाला, जोहल ढाए वाला, गुज्जरपुर और लुहार सहित कई गांवों का दौरा किया गया। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर पराली के उचित निपटारे के तरीकों की जानकारी भी दी।
आग लगाने के बजाय मशीनों का करें इस्तेमाल
इस मौके पर एसडीएम संजीव कुमार शर्मा ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने से बचें। उन्होंने कहा कि पराली के प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनरी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और इसका सीधा असर पर्यावरण तथा लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसके अलावा खेतों की मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीव-जंतु तथा मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं।
पराली जलाने पर पर्यावरण के साथ किसानों को भी नुकसान
अधिकारियों ने किसानों को चेतावनी दी कि पराली जलाने से केवल पर्यावरण और जमीन को ही नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि संबंधित किसानों को कानूनी कार्रवाई और आर्थिक जुर्माने का सामना भी करना पड़ सकता है।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय उचित तकनीकों से उसका प्रबंधन करें और जिले को पराली जलाने से मुक्त बनाने में सहयोग दें।
कृषि विभाग चला रहा जागरूकता अभियान
मुख्य कृषि अधिकारी तरनतारन डॉ. तेजबीर सिंह भंगू के नेतृत्व में कृषि विभाग की ओर से किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। विभागीय टीमें गांवों में पहुंचकर पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दे रही हैं।
प्रशासन का उद्देश्य किसानों के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है।

