Last Updated: September 21, 2026

Dainik Savera Times Logo

सिविल अस्पताल में बड़े घोटाले का पर्दाफाश, विजिलेंस ब्यूरो ने मांगा पूरा रिकॉर्ड

June 29, 2025

सिविल अस्पताल में बड़े घोटाले का पर्दाफाश, विजिलेंस ब्यूरो ने मांगा पूरा रिकॉर्ड

Punjab Vigilance Bureau: बठिंडा: पंजाब के बठिंडा जिले के सिविल अस्पताल से भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। विजिलेंस विभाग की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि अस्पताल में लंबे समय से बंद पड़ी सरकारी गाड़ियों और एंबुलेंसों में डीजल और पेट्रोल डलवाने के नाम पर लगभग 30 लाख रुपये के फर्जी बिल पास किए गए।

-फर्जी बिल से उड़ाया सरकारी पैसा

सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला अस्पताल में तैनात एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि ये वाहन वर्षों से कंडम घोषित हो चुके थे या कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम पर नियमित रूप से ईंधन डलवाने के बिल तैयार करवा कर भुगतान कराया गया। ये सभी बिल उसी अधिकारी द्वारा सत्यापित और पास किए गए हैं, जिस पर अब जांच की तलवार लटक रही है।

-विजिलेंस विभाग ने तलब किया पूरा रिकॉर्ड

राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 1 जून 2024 से 15 मई 2025 तक के सभी वाहनों—सरकारी, निजी, एंबुलेंस और जनरेटर—में डाले गए ईंधन के बिलों का ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही विजिलेंस यह भी जानना चाहती है कि अस्पताल में ईंधन की वास्तविक जरूरत कितनी थी। इसी के तहत मरीजों की संख्या, एंबुलेंस उपयोग का विवरण, और रसीदें जारी करने वाले कर्मचारियों की जानकारी भी मांगी गई है।

-छुट्टी के दिन दस्तावेजों से छेड़छाड़

शिकायतकर्ता हरतेज सिंह निवासी गांव घुद्दा ने बताया कि उन्होंने इस घोटाले की शिकायत पंजाब सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और बठिंडा डिप्टी कमिश्नर को भेजी थी। जांच की भनक लगते ही आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर 8 अप्रैल को, एक छुट्टी के दिन, अस्पताल पहुंचकर दस्तावेजों में फेरबदल की, ताकि प्रमाण मिटाए जा सकें। हरतेज सिंह ने यह भी दावा किया कि विजिलेंस जांच अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर ने खुद स्वीकार किया कि मामला 20 से 30 लाख रुपये के गबन से जुड़ा है।

-सरकार ने दिखाई सख्ती

शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन ने आंतरिक जांच के माध्यम से मामले को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन दस्तावेजों में हेराफेरी और अधिकारियों के असहयोग के कारण अब यह मामला पूरी तरह विजिलेंस विभाग के हवाले कर दिया गया है। संयुक्त निदेशक, कंप्लेंट सेल ने सिविल अस्पताल प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे जांच में पूरा सहयोग करें और सभी दस्तावेज़ तय समयसीमा में सौंपें।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें