Last Updated: October 7, 2026

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OTT से हटाई…अब गुरुद्वारों में दिखाई जायेगी दिलजीत की ‘सतलुज’: जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है फिल्म

July 8, 2026

OTT से हटाई…अब गुरुद्वारों में दिखाई जायेगी दिलजीत की ‘सतलुज’: जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है फिल्म

पंजाब डेस्क: दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद अब इसे पंजाब के कई गुरुद्वारों में मुफ्त दिखाने की पहल शुरू हो गई है। फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है।

फिल्म की पहली स्क्रीनिंग गुरदासपुर के गांव मानचोपड़ा स्थित गुरुद्वारा साहिब में आयोजित की गई, जहां अनाउंसमेंट के जरिए ग्रामीणों को फिल्म देखने के लिए बुलाया गया। इसके बाद मोगा के एक गुरुद्वारे में भी इसका प्रदर्शन किया गया।

अब पठानकोट के दो प्रमुख गुरुद्वारों में भी स्क्रीनिंग की तैयारी की गई है। इनमें गुरुद्वारा सिंह सभा, मॉडल टाउन और गुरुद्वारा सिंह सभा सेंट्रल (रानीपुर) शामिल हैं।

गांव-गांव तक फिल्म पहुंचाने की तैयारी

भारतीय किसान यूनियन के पंजाब यूथ अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह बैंस ने कहा कि फिल्म को केवल कुछ जगहों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। संगठन की योजना इसे पंजाब के अलग-अलग जिलों और गांवों तक पहुंचाने की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें।

वहीं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने भी फिल्म को लेकर बड़ा ऐलान किया है। कमेटी के मुताबिक गुरुद्वारों के अलावा स्कूलों और कॉलेजों में भी इसकी स्क्रीनिंग कराई जाएगी।

गुरुद्वारा प्रबंधकों का दावा- इतिहास को सामने लाने की कोशिश

पठानकोट के गुरुद्वारा प्रबंधक ने कहा कि यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के मानवाधिकार संघर्ष और उनके बलिदान की कहानी बताती है। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास से जुड़े इस मुद्दे को लोगों तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि अगर फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है तो धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से इसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

DSGMC ने स्कूल-कॉलेजों में स्क्रीनिंग का किया ऐलान

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने फिल्म के समर्थन में कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म को रोकना इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से को दबाने जैसा है। DSGMC ने गुरुद्वारों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों में भी स्क्रीनिंग और मानवाधिकार विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।

फिल्म में क्या दिखाया गया, जिस पर विवाद खड़ा हुआ?

फिल्म ‘सतलुज’ में पंजाब में 1990 के दशक के आतंकवाद के दौर और उस समय मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों को दिखाया गया है। पूर्व CM बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या का सीन भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी के लिए इस सीन को पुलिस की क्रूरता के एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है।

फिल्म में तत्कालीन पुलिस अधिकारी केपीएल गिल से जुड़े किरदार को भी दिखाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब में कथित अवैध दाह संस्कारों और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने की कोशिश की थी।

खालड़ा की हत्या और फिल्म की कहानी का अहम मोड़

फिल्म में 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या और इसके कुछ दिनों बाद जसवंत सिंह खालड़ा के कथित अपहरण की घटनाओं को दिखाया गया है। कहानी के अनुसार, खालड़ा उन मामलों को सार्वजनिक करने की कोशिश कर रहे थे जिनमें हजारों लोगों के गायब होने और कथित फर्जी मुठभेड़ों के आरोप लगाए गए थे।

केंद्र की चिंता- सुरक्षा और राजनीतिक असर पर नजर

फिल्म को OTT से हटाए जाने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सरकारी सूत्रों ने आशंका जताई है कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत विरोधी या अलगाववादी प्रचार के लिए किया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में आगामी राजनीतिक माहौल को देखते हुए सरकार इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी देख रही है। फिल्म की सामग्री और तथ्यों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाए जाने की बात भी सामने आई है।

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विवाद के बीच बढ़ी फिल्म देखने की मांग

OTT प्लेटफॉर्म से हटने के बाद ‘सतलुज’ को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। एक ओर जहां समर्थक इसे मानवाधिकार और इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण कहानी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को लेकर चिंता जता रहे हैं। फिलहाल पंजाब के कई हिस्सों में गुरुद्वारों के जरिए इसकी स्क्रीनिंग जारी रखने की तैयारी की जा रही है।

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