दसवीं की फीस ₹2,000, बारहवीं की ₹2,450; शिक्षक संगठन ने जताया विरोध
October 15, 2026
DTF Moga Opposes 12% Hike in PSEB Fees : मोगा। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से दसवीं और बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा फीस में करीब 12 प्रतिशत बढ़ोतरी किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) मोगा ने इस फैसले को विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन के नेताओं के अनुसार, अब दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 2,000 रुपये और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 2,450 रुपये परीक्षा फीस देनी होगी। उन्होंने छात्रवृत्ति, वर्दियों और शिक्षकों को परीक्षा ड्यूटी व पेपर चेकिंग का भुगतान नहीं मिलने के मुद्दे भी उठाए तथा शिक्षा बोर्ड से विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में फैसले लेने की अपील की।
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) मोगा ने इस बढ़ोतरी का कड़ा विरोध करते हुए इसे विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ करार दिया है। संगठन ने सरकार और शिक्षा बोर्ड से फीस वृद्धि का फैसला तुरंत वापस लेने की मांग की है। प्रेस के नाम जारी बयान में डीटीएफ मोगा के जिला प्रधान सुखपालजीत सिंह और जिला सचिव सुखविंदर सिंह घोलियां ने कहा कि एक तरफ सरकार ‘शिक्षा क्रांति’ के नाम पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा बोर्ड की ओर से परीक्षा फीस बढ़ाकर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की परेशानी बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को बेहतर और सुलभ शिक्षा उपलब्ध करवाना होना चाहिए, लेकिन फीस में लगातार बढ़ोतरी से गरीब परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और मुश्किल हो सकता है। जिला वरिष्ठ उपप्रधान गुरमीत सिंह झोरड़ा और उपप्रधान स्वर्ण दास ने कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार परीक्षा फीस में प्रति विद्यार्थी लगभग 200 से 300 रुपये तक की वृद्धि हुई है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। उनके अनुसार, अब दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 2,000 रुपये और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 2,450 रुपये परीक्षा फीस देनी होगी।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की आमदनी सीमित है और जिनके एक से अधिक बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उनके लिए बढ़ी हुई फीस का भुगतान करना बड़ी चुनौती बन सकता है। छात्रवृत्ति और वर्दियों के मुद्दे पर भी उठाए सवाल डीटीएफ नेताओं ने पंजाब सरकार की छात्र हितैषी नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि स्टेट स्कीम के तहत मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद करने और जरूरतमंद विद्यार्थियों को वर्दियां उपलब्ध नहीं करवाने से गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के दावों को तभी सार्थक माना जा सकता है, जब विद्यार्थियों को आर्थिक परेशानियों के बिना पढ़ाई जारी रखने के अवसर मिलें।
परीक्षा ड्यूटी और पेपर चेकिंग का भुगतान करने की मांग जिला संयुक्त सचिव अमनदीप माछीके और वित्त सचिव गुरशरण सिंह ने कहा कि शिक्षकों से परीक्षा ड्यूटी और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच जैसे महत्वपूर्ण कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार, पिछले समय से इन कार्यों के लिए शिक्षकों को भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने इस मामले में भी शिक्षा बोर्ड से उचित कदम उठाने की मांग की। डीटीएफ नेताओं ने मांग की कि बोर्ड परीक्षा फीस में की गई 12 प्रतिशत बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए। इसके साथ ही प्रमाणपत्रों में संशोधन से संबंधित फीस में की गई वृद्धि को भी वापस लिया जाए।
उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करवाने के बजाय पहले की तरह पारंपरिक पेपर मार्किंग व्यवस्था जारी रखने की मांग की। नेताओं ने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों से जुड़े फैसले लेते समय उनकी आर्थिक स्थिति, सुविधाओं और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। फीस में बढ़ोतरी वापस लेने से गरीब परिवारों को राहत मिलेगी और विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव कम होगा। इस अवसर पर अमरदीप सिंह बुट्टर, जगजीत सिंह रणियां, नरेंद्र सिंह, मोंटू वर्मा, दीपक मित्तल, नछत्तर सिंह और नवदीप सिंह धूड़कोट सहित बड़ी संख्या में शिक्षक नेता उपस्थित थे।