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Punjab Power Cut: जालंधर सहित आज इन शहरों में बंद रहेगी बिजली, जानें कितने घंटे लगेगा कट

Power Cut

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Punjab Power Cut: पंजाब में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। बिजली कटौती पर रोक के दावों के बावजूद आज सुबह कई शहरों में “गुड मॉर्निंग” बिजली कट के साथ हुई। लुधियाना, जालंधर और पठानकोट समेत कई इलाकों में सुबह 6 बजे से ही सप्लाई बाधित रही, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों और घरेलू उपभोक्ताओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

दावों के बावजूद जारी कटौती

बिजली विभाग की ओर से देर रात यह कहा गया था कि अनावश्यक पावर कट नहीं लगाए जाएंगे और 30 अप्रैल तक 11 केवी या उससे ऊपर के मेंटेनेंस कार्य बिना जोनल मंजूरी के नहीं होंगे। पहले से तय शटडाउन भी रद्द करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जमीनी हकीकत अलग नजर आई और कई शहरों में सुबह-सुबह बिजली गुल रही।

कई शहरों में पहले से तय कट

पावरकॉम ने पहले ही मोहाली, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में निर्धारित समय के लिए कटौती की योजना बनाई थी। हालांकि बढ़ती गर्मी और मांग के चलते ये कट अपेक्षा से ज्यादा महसूस हो रहे हैं।

जनता का गुस्सा फूटा

लगातार कटौती से परेशान लोगों ने कई जगह विरोध प्रदर्शन भी किए। मानसा और बुढलाडा में लोगों ने बिजली दफ्तरों का घेराव किया, जबकि बठिंडा के ग्रामीण इलाकों में लोग ग्रिड तक पहुंच गए। लोगों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली जाने से नींद तक पूरी नहीं हो पा रही।

मांग और सप्लाई में बड़ा अंतर

राज्य में बिजली की मांग तेजी से बढ़कर 12,130 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले पंजाब ने केंद्रीय पूल से करीब 7,000 मेगावाट बिजली खरीदी, जबकि लगभग 5,100 मेगावाट उत्पादन स्थानीय स्तर पर हुआ। इसके बावजूद सप्लाई मांग के अनुरूप नहीं बैठ पा रही।

तकनीकी वजह से बढ़ी समस्या

विशेषज्ञों के मुताबिक, पावर सिस्टम की फ्रीक्वेंसी 50 हर्ट्ज के आसपास संतुलित रहनी चाहिए। इसमें हल्का सा उतार-चढ़ाव भी फीडर ट्रिप का कारण बनता है। ज्यादा या कम फ्रीक्वेंसी दोनों ही स्थितियों में उपकरणों पर दबाव बढ़ता है और सप्लाई बाधित होती है।

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स्टाफ की कमी और हड़ताल का असर

बिजली संकट के पीछे एक बड़ी वजह तकनीकी स्टाफ की सीमित उपलब्धता भी है। कर्मचारी फिलहाल केवल निर्धारित कार्य ही कर रहे हैं और अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं ले रहे। 8 घंटे की ड्यूटी और जारी विरोध के चलते फॉल्ट ठीक होने में देरी हो रही है, जिससे कटौती लंबी खिंच रही है।

गर्मी के बढ़ते असर के बीच बिजली की मांग और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में अगर सप्लाई सिस्टम को तुरंत संतुलित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में लोगों को और ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है। फिलहाल, हालात यह संकेत दे रहे हैं कि “नो पावर कट” के दावे जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहे।

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