
Farmers Intensify Protest Over Pending Farm Policy : बठिंडा। कृषि नीति समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसानों और खेत मजदूरों का DC ऑफिस के सामने धरना चौथे दिन भी जारी रहा। किसान नेताओं ने पंजाब सरकार पर वादे पूरे न करने और लंबे समय से कृषि नीति लागू नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने MSP की कानूनी गारंटी, सरकारी खरीद, WTO से बाहर निकलने और लैंड पूलिंग नीति को लेकर भी सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की तो 5 सितंबर को आंदोलन को और तेज करते हुए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस बीच राज्य के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट झंडा सिंह जेठुके, ज़िला प्रेसिडेंट शिंगारा सिंह मान, हरिंदर कौर बिंदू और हरजिंदर सिंह बग्गी ने कहा कि पंजाब सरकार आम लोगों से बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई थी, और उसने किसानों से भी पक्का वादा किया था कि वे पर्यावरण-अनुकूल और किसान-मज़दूर-हितैषी कृषि नीति बनाएंगे। हालांकि, साढ़े चार साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी कृषि नीति लागू नहीं की गई है।
इसके ड्राफ्ट को सार्वजनिक करवाने के लिए किसानों और मज़दूरों ने पिछले कुछ सालों में चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किए थे। उन्होंने कहा कि पद संभालने के तुरंत बाद, CM भगवंत मान ने किसान नेताओं के साथ बैठक की, किसानों से सुझाव मांगे, वादा किया और कृषि विशेषज्ञों से कृषि नीति का ड्राफ्ट भी तैयार करवाया। उन्होंने कहा कि हमारे सुझावों को सूची में शामिल करने के बाद जो किया जाना चाहिए था, सरकार ने अपने ही आदेशों पर बनी कृषि नीति को लागू तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि देश के शासकों की जन-विरोधी सामंती नीतियां लागू करने की लालच के कारण, सरकार अपनी ही किसान, मज़दूर, कृषि और पर्यावरण-अनुकूल कृषि नीति को लागू नहीं कर रही है, जिससे किसानों और मज़दूरों की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को कुछ राहत मिल सके। पंजाब खेत मज़दूर यूनियन के राज्य महासचिव लछमन सिंह सेवेवाला ने कहा कि सरकार की इन नीतियों के कारण न केवल किसान बल्कि मज़दूर भी दमन का शिकार हो रहे हैं।
मज़दूरों पर कर्ज़ लगातार बढ़ रहा है। रोज़गार के अवसर कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों और मज़दूरों के लिए खज़ाना खोलने के बजाय, सरकार बड़े पूंजीपतियों को रियायतें दे रही है। इस संबंध में उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक पूंजीपति, सुभाष चंद्रा, के 22,006.5 करोड़ रुपये के कर्ज़ को सिर्फ़ 6.5 करोड़ रुपये में निपटाने का फ़ैसला करके उन्हें सीधे 22,000 करोड़ रुपये की राहत देने की कोशिश की जा रही है। जहां सरकार किसानों को उनकी मांग के अनुसार पैसे नहीं दे रही है। वक्ताओं ने मांग की कि भारत को विश्व व्यापार संगठन (WTO) से बाहर निकल जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के समझौतों पर बातचीत रद्द की जानी चाहिए। सभी फसलों के लिए C2 फ़ॉर्मूले के तहत MSP और सरकारी खरीद की कानूनी गारंटी होनी चाहिए, खेती से जुड़े अलग-अलग संस्थानों के निजीकरण के लिए लाए जा रहे कानूनों और बिलों को रद्द किया जाना चाहिए। WTO को जल संसाधनों पर कब्ज़ा करने से रोकना चाहिए और पानी से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक आपसी भाईचारा बनाए रखते हुए सुलझाया जाना चाहिए। पंजाब सरकार को ज़मीन की ‘लैंड पूलिंग’ नीति को दोबारा लागू करने की कोशिश बंद कर देनी चाहिए। किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी और कहा कि अगर सरकार इसी तरह आपराधिक चुप्पी साधे रखती है, तो 5 सितंबर को सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसलिए, वक्ताओं ने सभी लोगों से 5 सितंबर को बड़ी संख्या में मोर्चों पर इकट्ठा होने की अपील की।
मेष: दिन शुभ रहेगा...