Last Updated: October 15, 2026

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पराली जलाने वालों पर सख्ती, तरनतारन में प्रशासन की निगरानी तेज

October 15, 2026

पराली जलाने वालों पर सख्ती, तरनतारन में प्रशासन की निगरानी तेज

Farmers Urged to Adopt Safe Stubble Management Methods : अमृतसर। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए, तरनतारन जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए एक विशेष अभियान शुरू किया है।

खदूर साहिब के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) संजीव शर्मा ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय, बेलर (balers) और अन्य कृषि मशीनों का उपयोग करके उसका सही तरीके से प्रबंधन करें। तरनतारन के उपायुक्त (DC) राहुल के निर्देशों के तहत, जिला प्रशासन पराली प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैला रहा है। साथ ही, पराली जलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

तरनतारन के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह भंगू के नेतृत्व में, कृषि विभाग की टीमें किसानों को फसल अवशेषों (पराली) के उचित प्रबंधन के तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। संजीव शर्मा ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण होता है, जो इंसानों, जानवरों, पक्षियों और पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है। इसके अलावा, पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद फायदेमंद सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है।

इसलिए, किसानों को उपलब्ध और सही तरीकों को अपनाना चाहिए, जैसे कि पराली को मिट्टी में मिला देना, मल्चिंग (mulching) करना, या बेलर की मदद से पराली की गांठें (bales) बनाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण और पराली जलाने को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कानूनी नियमों और निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

इसी तरह, ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) ने भी पराली जलाने की घटनाओं को रोकने, फसल अवशेषों का सही निपटान करने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया है। कृषि विभाग के क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह और डॉ. रूपिंदरजीत सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे पराली प्रबंधन के लिए अपने स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें और उपलब्ध मशीनों का उपयोग करें।

उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए बेलर और अन्य कृषि उपकरणों का इस्तेमाल करने पर पराली जलाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी; बल्कि, इन अवशेषों का उपयोग अन्य उपयोगी कार्यों के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसानों के बीच पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के साथ-साथ, पराली जलाने की घटनाओं पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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