चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लिए गए प्रत्येक जनहितैषी निर्णय को जनता के परामर्श से लागू किया जा रहा है।
इसी कड़ी में, आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने लैंड पूलिंग योजना के अंतर्गत आने वाले 164 गाँवों के निवासियों के साथ नगर भवन में विचार-विमर्श किया और योजना से संबंधित उनकी प्रतिक्रिया और चिंताओं का समाधान किया।
बाद में, पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, हरदीप सिंह मुंडियां ने ग्रामीणों के साथ हुई चर्चा का विवरण दिया और बताया कि लोगों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का मौके पर ही समाधान किया गया, जिससे ग्रामीण पूरी तरह संतुष्ट हुए।
लोगों के सवालों के जवाब में नीति की विशेषताओं के बारे में बताते हुए, कैबिनेट मंत्री ने कहा कि जिस दिन आशय पत्र (एलओआई) जारी होगा, उसी दिन से किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपये मिलेंगे और किसान अपनी ज़मीन पर खेती जारी रख सकेंगे।
ज़मीन मालिकों द्वारा आवेदन करने के 21 दिनों के भीतर एलओआई और 50,000 रुपये नकद प्रदान किए जाएँगे। जिस दिन सरकार कब्ज़ा लेगी, उसी दिन से प्रति एकड़ 1 लाख रुपये प्रति वर्ष की दर से पट्टा राशि दी जाएगी और यदि सरकार दो या तीन साल का समय लेती है, तो पट्टा राशि में 10% वार्षिक वृद्धि की जाएगी।
मुंडियन ने बताया कि बैठक में किसानों की शंकाओं का समाधान किया गया और योजना को जनसमर्थन मिला। उन्होंने अन्य गाँवों के निवासियों से भी विपक्षी दलों के भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने का आग्रह किया।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में भी संबंधित गाँवों के किसानों के साथ बैठकें करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि किसानों को लैंड पूलिंग योजना के तहत आवासीय और व्यावसायिक भूखंड मिलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पिछली सरकारों ने केवल चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा दिया, जिससे अनियोजित शहरी विकास हुआ और कॉलोनीवासी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे।
कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा, “नई योजना यह सुनिश्चित करेगी कि नियोजित कॉलोनियों में व्यावसायिक संपत्तियाँ किसानों के लिए आय का एक स्थायी स्रोत बनें।”
मुंडियन ने ज़ोर देकर कहा कि नियोजित विकास को प्राथमिकता देने वाली यह प्रगतिशील लैंड पूलिंग योजना जन-हितैषी भी है, जिसके बारे में विपक्षी दल अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री ने फिर स्पष्ट किया कि लैंड पूलिंग योजना के तहत ज़मीन का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा, बल्कि सभी फ़ैसले किसानों की सहमति से लिए जाएँगे, जिससे किसानों को फ़ायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत केवल सहमति देने वाले किसानों की ज़मीन ही ली जाएगी।
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