
मोगा: त्योहारों का सीजन शुरू होते ही जहां घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं, वहीं महंगाई ने लोगों की खुशियों का बजट बिगाड़ दिया है। चीनी, घी, तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। अगस्त में 44 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी के दाम अक्टूबर में बढ़कर 62 से 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इसका असर न केवल घरेलू बजट पर पड़ रहा है, बल्कि मिठाई तैयार करने वाले कारोबारियों को भी बढ़ती लागत और सीमित बिक्री के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा है।
त्योहारों के दौरान घरों में खीर, हलवा, गुलाब जामुन सहित कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इसके अलावा बाजारों से मिठाइयां खरीदने का चलन भी बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से त्योहारों की तैयारियां महंगी हो गई हैं। सीमित आमदनी में परिवार का खर्च चलाने वाले लोगों को अब घरेलू जरूरतों और त्योहारों की खरीदारी के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
पहले 20 किलो खरीदते थे, अब पांच किलो तक सिमटी खरीदारी
करियाना दुकानदार ने बताया कि पिछले कुछ समय के दौरान चीनी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, चीनी के दाम में हाल ही में कुछ कमी आई है और अब यह करीब 59 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इसी तरह गुड़ की कीमत भी पहले 65 रुपये प्रति किलो थी, जो अब घटकर लगभग 60 रुपये रह गई है। दुकानदार ने कहा कि महंगाई के कारण ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई है। पहले कई ग्राहक एक बार में 20 किलो तक चीनी खरीदकर ले जाते थे, लेकिन अब ज्यादातर ग्राहक पांच किलो तक ही खरीदारी कर रहे हैं। त्योहारों का सीजन होने के बावजूद बाजार में ग्राहकों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं है। दूसरी ओर, दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च पूरे करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
15 हजार रुपये का राशन अब 15 दिन में खत्म
दुकान से राशन खरीदने पहुंची एक महिला ने महंगाई को लेकर अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहा कि पहले 15 हजार रुपये का राशन पूरे महीने चल जाता था, लेकिन अब इतनी राशि का सामान केवल 15 दिन में ही खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि मेहनत-मजदूरी करके परिवार का गुजारा करना पड़ता है, लेकिन जरूरी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। महिला के अनुसार, चीनी, तेल और घी सहित रोजमर्रा की जरूरतों की लगभग सभी वस्तुएं महंगी हो गई हैं। सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करना और दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से मिठाई कारोबार प्रभावित
मिठाई कारोबारी बिंदू सूध ने बताया कि पहले चीनी की कीमत करीब 40 से 42 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसके अलावा ड्राई फ्रूट और अन्य कच्चे माल की कीमतों में भी काफी वृद्धि हुई है। इससे मिठाइयां तैयार करने की लागत बढ़ गई है और कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जब कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं तो तैयार उत्पाद की लागत बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में मिठाइयों के दाम बढ़ाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन महंगाई के कारण ग्राहक भी सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। अब अधिकतर लोग त्योहार से एक-दो दिन पहले ही मिठाइयां खरीदते हैं, जिससे दुकानदारों को सीमित समय में बिक्री करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
बिंदू सूध ने कहा कि कारोबार के अन्य खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। यदि बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होती तो कर्मचारियों का वेतन और दूसरे खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है। कुल मिलाकर, त्योहारों के इस सीजन में महंगाई ने जहां आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं करियाना दुकानदारों और मिठाई कारोबारियों के लिए भी कारोबार चलाना चुनौती बन गया है।
📍 Location: मोगा
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