चंडीगढ़: पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को पंजाब सरकार के बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) प्रावधानों में महत्वपूर्ण संशोधनों की घोषणा की, जिससे दीर्घकालिक विशेष जरूरतों वाले बच्चों की देखभाल करने वाले माता-पिता को बहुत जरूरी लचीलापन और अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि वे अपने करियर से समझौता किए बिना उनकी भलाई के लिए समय समर्पित कर सकें।
यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में इसका खुलासा करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ये बदलाव कामकाजी माता-पिता की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो बच्चों की देखभाल संबंधी अनोखी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले बाल देखभाल अवकाश नीति केवल 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिग बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए थी।
उन्होंने कहा, “जबकि इस पहल ने कामकाजी माताओं को आवश्यक सहायता प्रदान की, इसमें विविध पारिवारिक संरचनाओं और एकल पिताओं और गंभीर विकलांग बच्चों के माता-पिता के सामने आने वाली विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में नहीं रखा गया।”
वित्त मंत्री ने कहा कि इन कमियों को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने मौजूदा सी.सी.एल. प्रावधानों में दो महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।
उन्होंने कहा, “सबसे पहले, चाइल्ड केयर लीव का लाभ अब एकल पुरुष अभिभावकों को भी दिया जाएगा, जिसमें विधुर, तलाकशुदा पिता और अविवाहित पिता शामिल हैं। दूसरा, सरकार ने गंभीर विकलांगता वाले 40 प्रतिशत विकलांग बच्चों के लिए 18 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा में छूट दी है।”
वित्त मंत्री ने आगे बताया कि यह संशोधन सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, बौद्धिक विकलांगता की गंभीर और गहन डिग्री, मल्टीपल स्केलेरोसिस और बहरापन-अंधापन सहित कई विकलांगताओं से पीड़ित बच्चों के माता-पिता के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रगतिशील कदम बच्चों की देखभाल में पिता की महत्वपूर्ण भूमिका को भी स्वीकार करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें अपने व्यावसायिक उत्तरदायित्वों तथा माता-पिता के कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाने के लिए समान समर्थन मिले।
चीमा ने कहा कि एकल पिताओं को यह अवकाश प्रदान करके सरकार ने लिंग-समावेशी नीतियों पर अपना रुख मजबूत किया है, जो आधुनिक परिवारों की वास्तविकताओं को पूरा करती हैं।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बात पर जोर दिया कि ये संशोधन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की कर्मचारी कल्याण और समावेशिता को प्राथमिकता देने वाली कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि संशोधित नीति से कामकाजी माता-पिता, विशेषकर असाधारण देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों का सामना कर रहे माता-पिता पर बोझ काफी कम हो जाएगा, तथा इससे वे बिना किसी पेशेवर प्रभाव के अपने बच्चों को आवश्यक ध्यान और देखभाल प्रदान करने में सक्षम हो जाएंगे।

