
अमृतसर: जलप्रलय से हुए नुकसान का मुआवजा प्रभावित परिवारों को 45 दिनों के भीतर दिया जाएगा। जिले के प्रभावित गांवों की गिरदावरी का काम शुरू कर दिया है। किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा देने के साथ-साथ पशुपालन विभाग पशुओं को हुए नुकसान की भी रिपोर्ट के अलावा, मकानों को हुए नुकसान, जमीन में पड़ी रेत आदि का आकलन भी तैयार किया जाएगा, ताकि प्रत्येक प्रभावित परिवार को समय पर मुआवजा दिया जा सके। जिसके लिए पटवारी, कानूनगो, तहसीलदारों के अलावा अन्य अधिकारियों की ड्युटी लगा दी गई।
इसलिए अधिकारी को जिस भी विभाग को गिरदावरी के लिए गांव में जाना है, वह गांव के गुरुद्वारा में मुनादी करवाए, ग्रामीणों को सूचित करवाए, गांव के गणमान्य लोगों से मिले और संबंधित गांव के पंचायत सचिव को साथ ले जाए, ताकि पूरे गांव को पता चल सके कि गांव में गिरदावरी हो रही है और वे संबंधित कर्मचारी को अपने नुकसान के बारे में सूचित कर सकें।
उन्होंने कहा कि जिन गांवों में 100 प्रतिशत फसलें और मकान नष्ट हो गए हैं, उनकी रिपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी, ताकि उन लोगों को तुरंत मुआवजा जारी किया जा सके। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा फसलों के नुकसान का मुआवजा 20 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाना है। इसके अलावा, मकानों के नुकसान के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए और कम नुकसान होने पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे।
जिन लोगों के पशु बाढ़ के कारण मर गए हैं, उनके बारे में भी रिपोर्ट बनाई जाए, ताकि ऐसे पशुपालकों को मुआवजा दिया जा सके। जिन गांवों में नदी ने रेत गिराई है, उन्हें इस मिट्टी को हटाने के लिए भी पैसे दिए जाएंगे। इसलिए उनकी गिरदावरी में उनका भी उल्लेख किया जाए। इसके अलावा, जिन लोगों की ज़मीनें नदी के कारण प्रदूषित हुई हैं, उनकी ज़मीनें भी गिरदावरी में दर्ज की जाएं ताकि सरकार उन्हें मुआवज़ा दे सके।
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