अमृतसर: सिख धर्म के संस्थापक प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के पवित्र जन्मस्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब के लिए भारत से एक विशेष गोल्डन फाइबर पालकी साहिब पाकिस्तान भेजी गई है। यह पालकी अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से रवाना की गई, जिससे दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव की एक सुंदर मिसाल देखने को मिली।
जानकारी के मुताबिक, इस पालकी साहिब का निर्माण संत महापुरुष बाबा दर्शन सिंह कुल्ली वालों की प्रेरणा से करवाया गया। उनके सेवादार बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वालों ने इसकी तैयारी और सेवा का कार्य संभाला। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाले सिख श्रद्धालु भाई महेश सिंह की विशेष मांग पर यह पालकी तैयार की गई, जिसे गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में स्थापित किया जाएगा।
अटारी सीमा पर पूरी हुई प्रक्रिया
बुधवार को पालकी साहिब को अमृतसर के अटारी स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) पहुंचाया गया, जहां भारतीय कस्टम विभाग और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की मौजूदगी में सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद पालकी को पाकिस्तान भेजने की औपचारिक कार्रवाई संपन्न हुई।
इस दौरान कस्टम विभाग के अधिकारियों ने पालकी साहिब को संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया सुनिश्चित की। सीमा पर मौजूद धार्मिक प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस अवसर को विशेष महत्व का बताया।
श्रद्धालुओं में उत्साह
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रतिनिधियों के अनुसार, पालकी साहिब को वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान के प्रतिनिधियों और स्थानीय सिख समुदाय के सदस्यों को सौंपा जाएगा। इसके बाद इसे सम्मानपूर्वक ननकाना साहिब ले जाया जाएगा।
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भाईचारे और सांझी विरासत का प्रतीक
धार्मिक संगठनों और सिख श्रद्धालुओं ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक भेंट नहीं, बल्कि गुरु नानक देव जी के प्रेम, सेवा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि इस तरह की पहलें भारत और पाकिस्तान के बीच साझा धार्मिक विरासत को मजबूत करती हैं तथा दोनों देशों के लोगों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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