नवांशहर : कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई पर रोक लगाने और प्रसव पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) एक्ट का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में सिविल सर्जन डॉ. अमन सूद ने वीरवार को नवांशहर में विभिन्न निजी अल्ट्रासाउंड स्कैन केंद्रों की अचानक जांच की। इस दौरान केंद्रों के रिकॉर्ड सहित पीसीपीएनडीटी एक्ट से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।
इस अवसर पर जिला परिवार कल्याण अधिकारी डा. हरीश कृपाल और कार्यकारी पीएनडीटी कोऑर्डिनेटर हरनेक सिंह भी मौजूद रहे। सिविल सर्जन डा. अमन सूद ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के लिंग की जांच करना या करवाना कानूनन अपराध है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक का इस्तेमाल लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए होना चाहिए, न कि भ्रूण के लिंग की पहचान के लिए। उन्होंने सभी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों को पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत निर्धारित सभी नियमों और हिदायतों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या मानवता पर कलंक है। इसे खत्म करने के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ समाज की सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। बेटियां समाज की मजबूत नींव हैं और उन्हें जन्म से पहले ही खत्म करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय एवं सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
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