Last Updated: November 6, 2026

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राष्ट्रीय आहार सप्ताह: संतुलित भोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने किया जागरूक

September 4, 2026

राष्ट्रीय आहार सप्ताह: संतुलित भोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने किया जागरूक

Health Department Spreads Awareness on Balanced Diet : फरीदकोट। राष्ट्रीय आहार सप्ताह के तहत फरीदकोट स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप सिंगला ने जागरूकता बैनर और पैम्फलेट जारी करते हुए गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, किशोरों और आम लोगों को पौष्टिक एवं संतुलित भोजन अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और मोटापे जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

सिविल सर्जन ने आज इस सप्ताह के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक बैनर और पैम्फलेट भी जारी किया। इस मौके पर असिस्टेंट सिविल सर्जन डॉ. परवजीत सिंह गुलाटी, डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर सुधीर धीर, डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर डॉ. प्रभदीप सिंह चावला, सीनियर फार्मेसी ऑफिसर सुनील सिंगला और स्टेनो संतोष शर्मा भी मौजूद थे। इस मौके पर जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप सिंगला ने कहा कि ‘नेशनल डाइट वीक’ का मकसद गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, किशोरों और सभी उम्र के लोगों को संतुलित आहार और संतुलित भोजन के स्रोतों के बारे में जागरूक करना है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरे साल संतुलित आहार के बारे में जागरूकता फैलाते हैं, लेकिन इस सप्ताह के दौरान एक खास अभियान के ज़रिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस मौके पर डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर सुधीर धीर और डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर डॉ. प्रभदीप सिंह चावला ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त काम के साथ-साथ अपने खान-पान का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को रोज़ाना ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जिनमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, पानी, फैट, विटामिन और मिनरल सही मात्रा में हों, जैसे हरी सब्ज़ियां, सलाद, दूध, मौसमी फल, उबली हुई और अंकुरित दालें आदि। उन्होंने गर्भवती माताओं से अपील की कि वे अपने पेट में पल रहे बच्चे के आहार को ध्यान में रखते हुए साफ़ और संतुलित भोजन करें और कम से कम 4 बार किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जाँच करवाएँ, ताकि स्वस्थ बच्चे का जन्म हो और माँ की सेहत भी अच्छी रहे।

मां का दूध नवजात शिशु के लिए संपूर्ण पौष्टिक आहार है, इसलिए बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करा देना चाहिए और शुरुआती छह महीनों तक सिर्फ़ माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। छह महीने के बाद, माँ को अपने दूध के साथ-साथ बाहरी भोजन भी देना शुरू कर देना चाहिए और 2 साल तक स्तनपान जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि तली-भुनी चीज़ें, फ़ास्ट फ़ूड, ज़्यादा नमक, ज़्यादा चीनी, शराब और सिगरेट से बचना चाहिए। असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और मोटापे जैसी गैर-संचारी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। इसलिए, हमेशा संतुलित आहार लेना चाहिए और शारीरिक व्यायाम पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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