
शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू रविवार को श्री आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के मौके पर शुरू हुए धार्मिक समारोह में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने गुरुद्वारे में मत्था टेका।
इस मौके पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने आस्था, इंसानियत और सच्चाई को बनाए रखने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
उन्होंने न सिर्फ सिख धर्म के लिए बल्कि हर धर्म और हर पंथ के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। ज़ुल्म के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की गुरु तेग बहादुर की हिम्मत आज भी हमें रास्ता दिखाती है।
उन्होंने आगे कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं हमें आपसी सम्मान, भाईचारे और सहनशीलता के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु का जीवन अनेकता में एकता और लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत करने के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब समाज को शांति, मेलजोल और सामाजिक न्याय की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है, गुरु तेग बहादुर जी की विरासत और भी अहम हो जाती है।”
इस मौके पर MLA हरदीप सिंह बावा, विवेक शर्मा और दूसरे जाने-माने मेहमान भी मौजूद थे।
गुरु तेग बहादुर, जिन्हें “हिंद की चादर” के नाम से याद किया जाता है, ने 1675 में आस्था की आज़ादी के अधिकार को बनाए रखने के लिए अपनी जान दे दी थी। उनकी शहादत भारत के सामाजिक-धार्मिक इतिहास में एक अहम जगह रखती है, जो अलग-अलग सोच की सुरक्षा और नागरिक आज़ादी की सुरक्षा का प्रतीक है। राज्य सरकार ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद दया, बराबरी और मज़बूती पर उनकी शिक्षाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस को मनाने का मकसद नौवें सिख गुरु की कुर्बानी का सम्मान करना और लोगों की धार्मिक भावनाओं को बनाए रखना है। इस दिन को मनाने के लिए, सिख गुरुद्वारों में खास प्रार्थना करते हैं।
ये भी पढ़ें: नए रंग में लॉन्च हुई Yamaha XSR 155, दिए गए हैं शानदार फीचर्स