मोगा: जिला मजिस्ट्रेट-कम-डिप्टी कमिश्नर मोगा सागर सेतिया द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए साइबर कैफे मालिकों को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
निर्देशों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे किसी अज्ञात व्यक्ति, जिसकी पहचान के बारे में साइबर कैफे का मालिक सुनिश्चित न हो, उसे साइबर कैफे का प्रयोग करने से रोका जाना चाहिए। साइबर कैफे में आने वाले/प्रयोग करने वाले व्यक्तियों की पहचान रजिस्टर में दर्ज करना सुनिश्चित किया जाए। रजिस्टर में आने वाले/प्रयोगकर्ता से उसकी अपनी लिखावट में उसका नाम, पता, टेलीफोन नंबर और पहचान प्रमाण आदि दर्ज करवाया जाए।
प्रयोगकर्ता की पहचान पहचान पत्र, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और फोटो क्रेडिट कार्ड के माध्यम से की जाए। मुख्य सर्वर में एक्टिविटी सर्वर लॉग सुरक्षित रखा जाए तथा इसका रिकॉर्ड मुख्य सर्वर में कम से कम 6 महीने तक रखा जाए। यदि साइबर कैफे में आने वाले किसी व्यक्ति की गतिविधि पर किसी भी प्रकार का संदेह उत्पन्न होता है तो साइबर कैफे मालिक इसकी सूचना पुलिस स्टेशन को अवश्य दें। व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए गए कंप्यूटर का रिकॉर्ड दर्ज किया जाना भी अनिवार्य है।
जिला मजिस्ट्रेट सागर सेतिया ने बताया कि मोगा में बड़े स्तर पर व्यावसायिक स्थान/दुकानें साइबर कैफे के नाम से जानी जाती हैं। इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए, जिसमें ई-मेल करना भी शामिल है, बड़ी संख्या में लोग इन स्थानों पर जाते हैं। कुछ समाज-विरोधी तत्व, अपराधी और आतंकवादी इन सुविधाओं का प्रयोग सुरक्षा/जांच एजेंसियों, लोगों में अफरा-तफरी फैलाने, आम जनता, वी.आई.पी. और सरकारी संस्थानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने तथा ऐसी आतंकवादी गतिविधियां चलाने के लिए कर सकते हैं, जो राज्य की सुरक्षा को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हों।
मानव जीवन के खतरों की रोकथाम, ऐसी आतंकवादी गतिविधियों को रोकने, जो राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं तथा समाज की शांति भंग कर सकती हैं, के लिए आवश्यक कार्रवाई करना जरूरी है।यह आदेश 31 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेंगे।
📍 Location: मोगा

