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बिजली टैरिफ बढ़ाने की बजाय पावरकॉम अपने बुनियादी ढांचे और कारगुजारी में जरूरी सुधार करे

अमृतसर: सन 2026-27 में बिजली का टैरिफ निर्धारित करने पर उद्योगपतियों की राय लेने को पंजाब स्टेट इलैक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन के चेयरमैन विश्वजीत खन्ना शुक्रवार को अमृतसर पहुंचे। अगले वित्तीय वर्ष में टैरिफ बढ़ाने के लिए पंजाब स्टेट ट्रांसमीशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसटीसीएल) तथा पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने कमिशन से अनुरोध किया था। खन्ना के साथ हुई बैठक में फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसो. के चीफ पैट्रन कमल डालमिया ने कहा कि अमेरिका-वेनेजुएला-ईरान-चीन-रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध जैसे बने हालातों से पैदा वैश्विक अशांति से व्यापार और उद्योग मंदी से गुजर रहे हैं।

इसलिए मौजूदा स्थिति में टैरिफ बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार जरुरी है, ताकि उपभोक्ता को बेहतर सुविधा मिल सके। इतना ही नहीं, एसजीएस, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, सीमेंस एजी, हनीवेल इंटरनेशनल जैसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ ऊर्जा सलाहकारों की मदद से अपने कामकाज में सुधार का भी प्रयास करना चाहिए। पीएसपीसीएल ने पिछले दो वर्षों में अपने कामकाज में सुधार करने का प्रयास किया है, जिसके परिणामस्वरूप उनके वार्षिक खातों में खासी बढ़ौतरी देखी गई है, वहीं टूरिज्म को इंडस्ट्री का दर्जा तो दिया गया, लेकिन उससे संबंधित होटल जैसे अन्य कारोबारियों से कमर्शियल रेट वसूला जा रहा है, जोकि सही होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब में उपभोक्ताओं को हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर जैसे पड़ोसी राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जहां बिजली की दरें अपेक्षाकृत कम हैं, जिसके कारण नए उद्योग उन राज्यों में स्थानांतरित हो रहे हैं। हर साल टैरिफ में वृद्धि का प्रमुख कारण यह है कि पंजाब में बिजली आपूर्ति के मामले में पीएसपीसीएल का एकाधिकार है। कामकाज में सुधार लाने की दृढ़ इच्छा शक्ति से कल्पना से अलग परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएसपीसीएल के वजूद में आने के बाद स्माल पावर (एसपी), मीडियम स्केल (एमएस) और लार्ज स्केल (एलएस) कैटागिरी लिमिट में संशोधित नहीं किया गया है।

मौजूदा समय में स्माल पावर में 20 किलोवाट तक की सीमा है, जबकि इसे बढ़ाकर 50 किलोवाट करना चाहिए। मीडियम स्केल की सीमा 21 से 99 किलोवाट से बढ़ाकर 51 से 200 किलोवाट तथा लार्ज स्केल में सीमा 100 से अधिक से बढ़ाकर 200 किलोवाट से अधिक तक करनी प्रस्तावित है। पीएसपीसीएल 16 जून से 15 अक्टूबर (4 महीने) तक सभी मध्यम और बड़े पैमाने के उपभोक्ताओं से शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच उद्योग द्वारा खपत की गई बिजली पर पीक लोड शुल्क के रूप में 2 रुपए प्रति यूनिट और 20 प्रतिशत टैक्स वसूल रहा है। पंजाब में मानसून शुरू होने पर किसानों की बिजली की मांग में कमी आने के कारण इन शुल्कों को वापस ले लिया जाना चाहिए।

इससे अधिकांश लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों को पड़ोसी राज्यों के उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पीएसपीसीएल को न्यू सप्लाई कोड 2024 के अनुसार मीडियम स्केल और लार्ज स्केल उपभोक्ताओं से 30 दिन की बिजली खपत के आधार पर सिक्योटिी डिपोजिट राशि की मांग करनी चाहिए, जबकि पहले यह नियम 45 दिनों का था। निगम को उक्त उपभोक्ताओं से ली गई अतिरिक्त 15 दिनों की सुरक्षा जमा राशि निर्धारित समय के भीतर वापस करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब औद्योगिक नीति 2022 के अनुसार, पीएसपीसीएल उन नई इकाइयों को बिजली शुल्क की छूट की प्रतिपूर्ति नहीं कर रहा है जिनके पास बिजली शुल्क छूट प्रमाणपत्न हैं। वर्तमान में, पीएसपीसीएल में लाइनमैन और जूनियर इंजीनियरों की भारी कमी है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को विलंबित और अप्रभावी सेवाएं मिल रही हैं। पीएसपीसीएल को योग्य और सक्षम व्यक्तियों की नियुक्ति करके कर्मचारियों की इस कमी को दूर करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिजली सब-स्टेशनों में दशकों पुरानी ट्रांसमिशन लाइनें और उपकरण है। उपभोक्ताओं को निर्बाध और सुचारू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उन्हें दुरुस्त करना होगा। वर्तमान में, पीएसपीसीएल अधिकारियों के कार्यालय अमृतसर में जगह-जगह बिखरे हुए हैं। उदाहरण के लिए, सीमा रेंज के मुख्य अभियंता का कार्यालय राजा सांसी रोड पर है, अधीक्षक एवं कार्यकारी अभियंता के कार्यालय हॉल गेट पर हैं और एसडीओ का कार्यालय मॉल मंडी में है।

पीएसपीसीएल एक नया कार्यालय सचिवालय भवन बनाए जिसमें एक उपयुक्त बैठक कक्ष हो, जहाँ सभी वरिष्ठ अधिकारी एक ही छत के नीचे रहकर तेजी से काम कर सकें। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से न तो पीएसपीसीएल के अध्यक्ष ने अमृतसर का दौरा किया है और न ही अमृतसर के चीफ इंजीनियर ने एमएसएमई उपभोक्ताओं के साथ कोई बातचीत की है। पीएसपीसीएल के अधिकारियों को उपभोक्ताओं के साथ नियमित बैठकें करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पीएसपीसीएल सौर ऊर्जा को 2.97 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीद रही है, जबकि स्थानीय उद्योग को बिजली 6.70 रुपए (20 प्रतिशत टैक्स सहित) प्रति यूनिट की दर से बेच रही है। उन्होंने कहा कि फोकल प्वाइंट में 6000 वर्ग गज का प्लाट 1993 से 132 किलोवाट-वोल्टेज विद्युत सबस्टेशन की स्थापना के लिए आरक्षित है। इसके शीघ्र स्थापित होने से फोकल प्वाइंट और आसपास के क्षेत्नों में स्थित लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को चौबीसों घंटे, सातों दिन, साल के 365 दिन निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्राप्त होगी। दुर्भाग्यवश, यह मामला पिछले तीन दशकों से लंबित है।

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