Last Updated: October 16, 2026

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जिंदा है जसवंत सिंह खालड़ा का हत्यारा DSP? नाभा ओपन जेल ने होशियारपुर पुलिस को ढूंढने के दिए निर्देश

July 9, 2026

जिंदा है जसवंत सिंह खालड़ा का हत्यारा DSP? नाभा ओपन जेल ने होशियारपुर पुलिस को ढूंढने के दिए निर्देश

पंजाब डेस्क: फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल प्रशासन ने होशियारपुर पुलिस को पत्र जारी कर इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व डीएसपी जशपाल सिंह का वर्तमान ठिकाना पता लगाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने पुष्टि की है कि जेल प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ है।

निजी बॉन्ड पर मिली थी अंतरिम रिहाई

पूर्व डीएसपी जशपाल सिंह को मई 2023 में पटियाला की अदालत के आदेश पर एक लाख रुपये के निजी बॉन्ड पर अंतरिम जमानत दी गई थी। उस समय वह नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहा था। यह राहत उसकी सजा माफी के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लंबित रहने के कारण दी गई थी।

राज्यपाल के पास लंबित है सजा माफी का प्रस्ताव

पंजाब सरकार ने सितंबर 2022 में जशपाल सिंह की समय से पहले रिहाई (सजा माफी) का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। जेल प्रशासन का कहना है कि मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए जशपाल सिंह का पता लगाना जरूरी है।

हाई कोर्ट के आदेश के आधार पर मिली थी राहत

जेल अधिकारियों के अनुसार, हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश के तहत यदि सजा माफी के प्रस्ताव पर तीन महीने तक कोई निर्णय नहीं होता, तो अंतिम फैसला आने तक संबंधित कैदी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर पटियाला की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने जशपाल सिंह को अंतरिम जमानत देने का आदेश पारित किया था।

पहले भी खारिज हो चुकी है सजा माफी की अर्जी

इससे पहले वर्ष 2019 में तत्कालीन राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की आपत्तियों के बाद जशपाल सिंह की सजा माफी की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसकी उम्रकैद की सजा दोबारा प्रभावी हो गई थी। इसी दौरान टांडा के एक अन्य मामले में दोषसिद्धि के चलते वह जेल में ही रहा।

कोरोना काल में मिली पैरोल

कोविड-19 महामारी के दौरान जशपाल सिंह को पैरोल भी मिली थी। बाद में उसने हाई कोर्ट में राहत के लिए याचिका दायर की, लेकिन वर्ष 2022 में उसे वापस ले लिया। अदालत के निर्देशों के अनुसार उसने निर्धारित समय सीमा के भीतर सरेंडर किया। जेल रिकॉर्ड के मुताबिक उसने अपनी सजा का बड़ा हिस्सा ओपन जेल में बिताया है।

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क्या है जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड?

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का वर्ष 1995 में कथित तौर पर अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी। यह मामला देश के सबसे चर्चित मानवाधिकार मामलों में शामिल रहा है। वर्ष 2005 में सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व डीएसपी जशपाल सिंह और एक एएसआई को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि चार अन्य पुलिसकर्मियों को सात-सात वर्ष की सजा मिली थी।

बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एएसआई को बरी कर दिया, जबकि अन्य चार दोषी पुलिसकर्मियों की सजा सात वर्ष से बढ़ाकर उम्रकैद कर दी गई। यह मामला आज भी न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।

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