Last Updated: November 6, 2026

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पैरों ने साथ छोड़ा, हौसले अब भी बुलंद : बिस्तर से ही रची आत्मनिर्भरता की इबारत

August 18, 2026

पैरों ने साथ छोड़ा, हौसले अब भी बुलंद : बिस्तर से ही रची आत्मनिर्भरता की इबारत

Legs gave way, but spirits remained high : मोगा। गांव दुसांझ निवासी करण करीब पांच साल से बिस्तर पर हैं, लेकिन उन्होंने अपनी मजबूरी को हार नहीं बनने दिया। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के बाद मजदूरी करने वाला करण आज अपने हाथों के हुनर से पक्षियों के पिंजरे बनाकर न केवल परिवार का सहारा बन रहा है, बल्कि हिम्मत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश कर रहा है।

हादसे से पहले करण मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा चलाते थे। काम के दौरान शटरिंग से संबंधित हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। परिवार के अनुसार, उन्हें पहले मोगा, फिर लुधियाना के डीएमसी अस्पताल और बाद में अमृतसर के निजी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया। ऑपरेशन और लंबे इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। इलाज पर लाखों रुपये खर्च हुए और परिवार को आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। इस मुश्किल समय में गांववासियों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार परिवार की मदद की। हालात कठिन थे, लेकिन करण ने हार मानने के बजाय अपने हुनर को अपनी ताकत बनाने का फैसला किया। बिस्तर पर रहते हुए वह मोबाइल फोन पर पक्षियों के पिंजरे बनाने की वीडियो देखते और उनसे तरीका सीखते रहे। धीरे-धीरे उन्होंने खुद पिंजरे तैयार करना शुरू कर दिए। मेहनत और लगन से बनाए गए पिंजरों को लोगों ने पसंद करना शुरू किया और उनकी बिक्री भी होने लगी। करण के मुताबिक, अब तक वह करीब 400 पक्षियों के पिंजरे तैयार कर चुके हैं। उनका कहना है कि जब वह बिस्तर पर रहते थे तो परिवार के खर्चों और दवाइयों की चिंता उन्हें परेशान करती थी। उन्होंने सोचा कि शरीर भले ही पूरी तरह साथ न दे रहा हो, लेकिन अपने हाथों के हुनर से परिवार का सहारा जरूर बन सकते हैं।

करण के परिवार में उनके माता-पिता, छोटा भाई और छोटी बहन हैं। परिवार का कहना है कि दवाइयों और घरेलू खर्चों के कारण कई बार आर्थिक परेशानियां सामने आती हैं, लेकिन करण ने अपनी स्थिति को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। करण की कहानी केवल संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि हिम्मत, हुनर और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। जिस बिस्तर को कभी उनकी मजबूरी माना जाता था, आज वही उनकी मेहनत और हुनर का केंद्र बन चुका है। उन्होंने साबित कर दिया कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमेशा पैरों की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी मजबूत हौसला और मेहनत ही इंसान को नई उड़ान दे देते हैं।

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