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मोगा: महेशरी सहकारी सोसायटी में पुराने कर्जों की दोबारा वसूली के नोटिस भेजने का आरोप

मोगा: गांव महेशरी की कोऑपरेटिव सोसायटी के हिस्सेदार किसानों ने सहकारी विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिन पुराने कर्जों का भुगतान किसान वर्षों पहले कर चुके हैं, उन्हीं कर्जों की दोबारा वसूली के लिए उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस कार्रवाई के कारण उन्हें मानसिक परेशानी और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले को लेकर शुक्रवार को किसानों ने डिप्टी रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसायटी को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग की।

डिप्टी रजिस्ट्रार को शिकायत देने के बाद किसान नेताओं बलदेव सिंह बब्बी, परमजीत सिंह पम्मा, तेज सिंह और सुखजिंदर महेशरी ने कहा कि सोसायटी से जुड़े किसानों ने 10, 20 और यहां तक कि 30 वर्ष पहले भी अपने कर्जों का भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद अब उन्हें उन्हीं कर्जों की वसूली के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब संबंधित कर्जों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, तो दोबारा वसूली के नोटिस भेजने का आधार क्या है? उन्होंने विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

ऑडिट करवाने के बजाय किसानों को डिफाल्टर बताने का आरोप

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सोसायटी में बड़े स्तर पर कथित भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना था कि सोसायटी के सचिव से लेकर उच्च अधिकारियों तक की जिम्मेदारी बनती है कि वे वार्षिक ऑडिट करवाकर वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करें और संस्था को सुचारू ढंग से चलाएं। लेकिन किसानों के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं की जांच करने के बजाय किसानों को डिफाल्टर साबित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके।

किसानों ने डिप्टी रजिस्ट्रार से मांग की कि सोसायटी के पुराने रिकॉर्ड, कर्जों के भुगतान से संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह स्पष्ट होना चाहिए कि सोसायटी को आर्थिक नुकसान कैसे हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। किसानों के अनुसार, यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए तथा सोसायटी को हुए नुकसान की भरपाई जिम्मेदार लोगों से करवाई जानी चाहिए।

वसूली गई राशि से नई मशीनरी खरीदने की मांग

किसानों का कहना है कि यदि पूरे मामले की बारीकी से जांच करवाई जाए और सोसायटी को हुए नुकसान की जिम्मेदारी तय की जाए, तो बड़ी रकम संस्था के खाते में वापस जमा हो सकती है। इस राशि का इस्तेमाल सोसायटी के लिए नई कृषि मशीनरी खरीदने में किया जा सकता है, जिससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सहकारी सोसायटियों का उद्देश्य किसानों की आर्थिक सहायता करना और उन्हें कृषि संबंधी सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसलिए सोसायटी के संसाधनों का इस्तेमाल किसानों के हित में होना चाहिए।

किसान नेताओं ने सरकार से मांग की कि भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए बिना देरी जांच शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि यदि कथित अनियमितताओं की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय किसानों को ही परेशान किया जाता रहा, तो वे आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बना सकते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जरूरत पड़ने पर कथित भ्रष्ट अधिकारियों को ‘सम्मानित’ करने का कार्यक्रम भी आयोजित किया जा सकता है, ताकि मामले की ओर सरकार और विभाग का ध्यान आकर्षित किया जा सके।

इस अवसर पर अमरजीत सिंह, जगतार सिंह नंबरदार, केवल सिंह प्रधान, सुखदेव सिंह, सिमरजीत सिंह, जसवंत सिंह, गुरप्रीत सिंह गोपी सहित अन्य किसान मौजूद थे। किसानों ने उम्मीद जताई कि विभाग उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करेगा और जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाकर उन्हें राहत दिलाई जाएगी।

📍 Location: मोगा

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