
Moga Sculptor Iqbal Singh Gill Creates Jobs for 12 People : मोगा। गांव माणूके निवासी मूर्तिकार इकबाल सिंह गिल ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर सफलता की मिसाल कायम की है। पिछले 26 वर्षों से मूर्तियां बनाने के व्यवसाय से जुड़े इकबाल सिंह ने अपने गांव में ही कारोबार स्थापित कर करीब 12 लोगों को रोजगार दिया है।
धार्मिक महापुरुषों, कबड्डी खिलाड़ियों और फिल्मी हस्तियों की मूर्तियां बनाने वाले इकबाल सिंह की कला देश-विदेश तक पहुंच रही है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि विदेश जाना ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है, बल्कि अपने हुनर के दम पर भी अपने क्षेत्र में रोजगार और कारोबार खड़ा किया जा सकता है। युवाओं को विदेश जाने के बजाय अपने क्षेत्र में कारोबार स्थापित करने का दिया संदेश कहते हैं कि अगर दिल में हौसला हो तो सपने साकार हो जाते हैं और मेहनत करने वालों के हाथ ही हुनर को नई पहचान देते हैं।
इस कहावत को सच कर दिखाया है मोगा जिले के गांव माणूके निवासी मूर्तिकार इकबाल सिंह गिल ने। पिछले 26 वर्षों से मूर्तियां बनाने के व्यवसाय से जुड़े इकबाल सिंह ने अपनी कला और मेहनत के दम पर न केवल अलग पहचान बनाई है, बल्कि अपने साथ करीब 12 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाया है। इकबाल सिंह गिल द्वारा धार्मिक महापुरुषों, कबड्डी खिलाड़ियों और फिल्मी जगत की हस्तियों सहित विभिन्न विषयों पर मूर्तियां तैयार की जाती हैं।
अब तक वह हजारों मूर्तियां बना चुके हैं। उनकी बनाई मूर्तियां देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों तक भी पहुंच रही हैं। स्कूलों, कॉलेजों, मंदिरों और गुरुद्वारों में उनकी कला के नमूने स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा गांवों के पार्कों में भी उनकी बनाई मूर्तियां लगाई गई हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अभिनेता धर्मेंद्र की भी बनाई मूर्तियां इकबाल सिंह गिल ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र की मूर्तियां भी तैयार की हैं।
उनका कहना है कि हर मूर्ति को आकार देने के लिए मेहनत, धैर्य और बारीकियों पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। किसी भी शख्सियत की मूर्ति बनाते समय उसके व्यक्तित्व और चेहरे की विशेषताओं को उकेरना सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि 26 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्होंने अपने हुनर को लगातार निखारा है। यही कारण है कि उनके काम को अलग-अलग स्थानों पर पहचान मिल रही है और उनके पास मूर्तियां तैयार करवाने के लिए ऑर्डर आते रहते हैं।
विदेश जाने का सपना छोड़ गांव में खड़ा किया कारोबार इकबाल सिंह ने बताया कि जीवन में उनका भी सपना विदेश जाकर काम करने का था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने हुनर के दम पर यहीं कारोबार स्थापित करने का फैसला किया। आज उनका यह निर्णय उनके परिवार के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बना हुआ है। उनके साथ करीब 12 लोग इस काम में लगे हैं और अपनी आजीविका कमा रहे हैं। मूर्तियां बनाने के साथ-साथ इकबाल सिंह को खेतीबाड़ी का भी शौक है और वह कृषि कार्यों से भी जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि वह करीब 15 वर्षों तक गुरुद्वारा मैदेआणा साहिब में भी अपनी सेवाएं निभा चुके हैं। युवाओं को दिया आत्मनिर्भर बनने का संदेश इकबाल सिंह गिल ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि विदेश जाना ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है। युवाओं को चाहिए कि वे अपने हुनर, रुचि और मेहनत को पहचानें तथा अपने क्षेत्र में ही रोजगार और कारोबार के अवसर तलाशें। कई लोग अपनी जमा-पूंजी खर्च करके विदेश जाने का प्रयास करते हैं, जबकि हुनर और सही दिशा में मेहनत के सहारे अपने देश में भी कारोबार स्थापित किया जा सकता है।
उनका मानना है कि यदि युवाओं को अपने काम के प्रति लगन हो और वे लगातार मेहनत करें, तो वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इकबाल सिंह की 26 वर्षों की कला यात्रा इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर भी पहचान और सफलता हासिल की जा सकती है।
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