Last Updated: November 3, 2026

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आठ साल से पराली नहीं जलाई, रणसीह कलां बना मिसाल

November 3, 2026

आठ साल से पराली नहीं जलाई, रणसीह कलां बना मिसाल
 

Moga Village Sets Example in Stubble Management : मोगा। पंजाब में पराली जलाने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए जहां सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं मोगा जिले के गांव रणसीह कलां ने इस दिशा में एक मिसाल कायम की है।

गांव के सरपंच प्रीत इंदर सिंह मिंटू ने पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने और किसानों को पराली जलाने से रोकने के उद्देश्य से दिवाली के अवसर पर करीब 31.50 लाख रुपये की कृषि मशीनरी का प्रबंध किया है। इन उपकरणों का छोटे किसान जरूरत के अनुसार निशुल्क इस्तेमाल कर सकेंगे। गांव में पिछले आठ वर्षों से पराली जलाने की कोई घटना सामने नहीं आने का दावा किया गया है। सरपंच की इस पहल का उद्देश्य किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाना है, ताकि आर्थिक तंगी या मशीनरी की कमी के कारण उन्हें पराली जलाने के लिए मजबूर न होना पड़े।

पंचायत और किसानों के सामूहिक प्रयासों से गांव में पराली को खेतों में मिलाकर अगली फसल की बिजाई करने की परंपरा को बढ़ावा दिया जा रहा है। छोटे किसानों के लिए उपलब्ध करवाई आधुनिक मशीनरी सरपंच प्रीत इंदर सिंह मिंटू ने बताया कि पराली प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली कृषि मशीनरी काफी महंगी है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाखों रुपये खर्च करके मशीनें खरीदना आसान नहीं होता। विशेषकर दो से चार एकड़ जमीन वाले किसानों को धान की कटाई के बाद कम समय में गेहूं की बिजाई के लिए खेत तैयार करने में परेशानी आती है। कई किसानों के पास पर्याप्त उपकरण और उन्हें चलाने के लिए उपयुक्त ट्रैक्टर भी उपलब्ध नहीं होते।

ऐसे में कुछ किसान मजबूरी में पराली जला देते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए गांव में करीब 31.50 लाख रुपये की कृषि मशीनरी का प्रबंध किया गया है। इसमें दो एमबी प्लाऊ, दो मल्चर, दो सुपर सीडर, ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण शामिल हैं। इन मशीनों की मदद से किसान पराली का उचित प्रबंधन कर सकेंगे और खेतों में समय पर अगली फसल की बिजाई कर पाएंगे। इससे छोटे किसानों पर मशीनरी खरीदने का आर्थिक बोझ भी कम होगा। वर्ष 2019 में शुरू हुई मुहिम, किसानों ने दिया सहयोग सरपंच ने बताया कि गांव को पराली के धुएं से मुक्त रखने के लिए वर्ष 2019 से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उस समय करीब पांच लाख रुपये की मशीनरी का प्रबंध करके किसानों को इसके निशुल्क इस्तेमाल की सुविधा दी गई थी। संसाधन सीमित होने के बावजूद गांव के किसानों ने इस मुहिम में पूरा सहयोग दिया और पराली जलाने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि किसानों और पंचायत के साझा प्रयासों से गांव में पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ी है। दिवाली पर नई कृषि मशीनरी उपलब्ध करवाना उन किसानों के सहयोग के प्रति आभार जताने और अन्य किसानों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का प्रयास है। पराली खेतों में मिलाने से मिट्टी की सेहत को फायदा गांव के किसान गोपाल सिंह ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और खेतों में मौजूद मित्र कीटों तथा अन्य जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचता है।

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