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राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने 3 कर्मियों की मौत मामले की FIR में SC/ST एक्ट जोड़ने के दिए निर्देश

National Commission for Safai Karamcharis

National Commission for Safai Karamcharis : लुधियाना में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) के वाइस चेयरमैन हरदीप सिंह गिल ने नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और कार्य परिस्थितियों की समीक्षा के लिए अपना दो दिवसीय दौरा पूरा किया। इस दौरान बचत भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

फैक्ट्री हादसे में 3 मौतों पर आयोग का सख्त रुख

बैठक में हाल ही में एक स्थानीय फैक्ट्री में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई तीन मजदूरों की मौत के मामले पर गंभीर चर्चा हुई। वाइस चेयरमैन ने इस घटना पर सख्त नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि दर्ज एफआईआर में ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट’ और ‘एससी/एसटी एक्ट’ की धाराएं तुरंत जोड़ी जाएं।

पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश

हरदीप सिंह गिल ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि मृतकों के परिवारों को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े परिवारों को जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से अतिरिक्त 8.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए गए।

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक

बैठक में नगर निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार, एडीसी शिखा भगत, जॉइंट कमिश्नर, एसडीएम सहित जिला प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आयोग ने सफाई कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की।

सफाई कर्मचारियों की समस्याओं पर एक महीने का अल्टीमेटम

आयोग ने वेतन में देरी, ईपीएफ (EPF) की समस्याएं, छुट्टियों और 2022 बैच के कच्चे कर्मचारियों को स्थायी करने जैसे लंबित मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई। लुधियाना नगर निगम को इन समस्याओं के समाधान के लिए एक महीने का समय दिया गया है।

सुरक्षा निगरानी के लिए नई कमेटियों के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला और एसडीएम स्तर पर निगरानी कमेटियां गठित करने के लिए 15 दिनों का समय निर्धारित किया गया है।

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कार्रवाई में देरी पर सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट की चेतावनी

आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि स्थानीय पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्देशों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

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