
अमृतसर: बागवानी को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू), लुधियाना के फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, अमृतसर की ओर से नाशपाती एस्टेट, वेरका में किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने बागवानों को पराली का उपयोग मल्चिंग के लिए करने, नाशपाती की वैज्ञानिक खेती अपनाने और फलों की गुणवत्ता बेहतर बनाने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराना और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बागवानों की आमदनी में भी सुधार किया जा सके।
पराली से मल्चिंग और बागों के रखरखाव पर जोर
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक (फल) डॉ. स्वरीत खैरा ने बागों में पराली बिछाने की तकनीक यानी मल्चिंग के लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने पौधों की उचित कटाई-छंटाई, खरपतवारों पर नियंत्रण तथा खाद और सिंचाई के सही प्रबंधन को अच्छी पैदावार के लिए जरूरी बताया।
उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर पौधों की बेहतर देखभाल की जा सकती है और फलों की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
कीटों से बचाव और फलों के विपणन की जानकारी
जिला प्रसार विशेषज्ञ (प्रमुख) डॉ. नरेंद्रपाल सिंह ने किसानों को उपज के बेहतर विपणन और खेती से जुड़े रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के महत्व से अवगत कराया। वहीं, डॉ. गुरमीत सिंह ने नाशपाती सहित अन्य फलदार पौधों को प्रभावित करने वाले कीटों और बीमारियों की पहचान तथा उनकी रोकथाम के उपाय साझा किए।
कार्यक्रम में जतिंदर सिंह संधू के अलावा बागवानी विभाग के विशेषज्ञ सुखपाल सिंह और तेजबीर सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को नाशपाती की खेती का विस्तार करने, फल उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के तरीकों के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने नए बाग लगाने तथा पुराने बागों को दोबारा विकसित करने के लिए उपलब्ध योजनाओं और सब्सिडी के बारे में भी बताया।
वैज्ञानिक खेती अपनाने से बढ़ सकती है किसानों की आय
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), अमृतसर के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. बिक्रमजीत सिंह गिल ने बागवानों को पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की अनुशंसित तकनीकों के अनुसार खेती करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नाशपाती के बागों में अंतरफसली खेती, फलों की सही समय पर तुड़ाई और उचित पैकिंग की प्रक्रियाओं पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि खेती के प्रत्येक चरण में वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
किसानों की समस्याओं पर हुआ विचार-विमर्श
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने बागवानों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान सुझाए। इस अवसर पर पीएयू की कृषि एवं बागवानी संबंधी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिससे किसानों को नई तकनीकों और विश्वविद्यालय की सिफारिशों से संबंधित साहित्य उपलब्ध हुआ।
इस किसान-वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से बागवानों को पराली के बेहतर इस्तेमाल, पर्यावरण के अनुकूल खेती और नाशपाती उत्पादन में सुधार के लिए प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों का उद्देश्य वैज्ञानिक बागवानी को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त करने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायता देना रहा।