
मोगा: पंजाब सरकार द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने का PCMS एसोसिएशन पंजाब ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि फीस बढ़ाने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के होनहार विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा के दरवाजे बंद न हों।
PCMS एसोसिएशन पंजाब के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. गगनदीप सिंह, SMO ने कहा कि पंजाब के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस पहले ही देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। अब फीस में 8.5 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने से विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी पर सालाना करीब 2.5 लाख रुपये का वित्तीय बोझ पड़ने की बात सामने आ रही है।

उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के होनहार बच्चों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा उपलब्ध करवाना होना चाहिए। यदि फीस में लगातार बढ़ोतरी होती रही तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए डॉक्टर बनने का सपना पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
डॉ. गगनदीप सिंह ने कहा कि “गरीब परिवार का होनहार बच्चा केवल पैसों की कमी के कारण डॉक्टर बनने के सपने से वंचित नहीं रहना चाहिए।” उन्होंने सरकार से अपील की कि मेडिकल शिक्षा को महंगा करने की बजाय इसे अधिक किफायती और आम विद्यार्थियों की पहुंच में बनाया जाए। PCMS एसोसिएशन पंजाब के प्रदेश महासचिव डॉ. सिमरनजीत सिंह ने कहा कि पंजाब पहले ही डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की असमान पहुंच जैसी गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे समय में मेडिकल शिक्षा की लागत बढ़ाना भविष्य में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के अधिक से अधिक अवसर मिलना जरूरी है। यदि आर्थिक कारणों से मेडिकल शिक्षा के अवसर सीमित होते हैं तो भविष्य में ग्रामीण और जरूरतमंद क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता पर भी इसका असर पड़ सकता है।
PCMS एसोसिएशन पंजाब ने पंजाब सरकार से मांग की है कि 8.5 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी का फैसला तत्काल वापस लिया जाए, सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस की दोबारा समीक्षा की जाए और आर्थिक रूप से कमजोर तथा मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा को किफायती बनाया जाए। एसोसिएशन ने कहा कि मेडिकल शिक्षा केवल आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
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मेष: दिन शुभ रहेगा...