
लुधियाना Plastic reverse vending machines: शहर की सबसे बड़ी समस्या बढ़ता कचरा है। रसायनिक प्रदूषण को बढ़ाने वाले प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए निगम द्वारा प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से करीब 2 साल पहले 10 प्लास्टिक रिवर्स वैंडिंग मशीनें खरीदी गई थीं। करीब 41 लाख की लागत से शहर के अलग-अलग इलाकों में लगाई गई इन मशीनों के माध्यम से रैपर समेत प्लास्टिक कचरे को रिसाइकल किया जाना था, परंतु इन मशीनों के अंदर प्लास्टिर बॉटल तो डाली गई लेकिन रिसाइक्लिंग का प्रोसैस नहीं हुआ क्योंकि कई जगहों पर मशीनों को बिजली कनैक्शन ही नहीं दिया गया, जिस वजह से आज यह मशीनें कचरे के डिब्बे में तबदील हो गई हैं। इसी मैंटेनैंस व देखरेख भी सही तरीके से नहीं हो पाई है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण ही इनका सही तरीके से प्रयोग नहीं हो सका है। डीसी कार्यालय में ही प्लास्टिक रिवर्स वैंडिंग मशीन काम नहीं कर रही हैं। ये मशीनें खड़ी खड़ी धूल फांक रही हैं।
बतां दे कि 2022 में लोकल बॉडीज डिपार्टमैंट के पूर्व मंत्री इंद्रबीर निज्जर ने विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा था कि प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से डीसी परिसर, सिविल अस्पताल आदि स्थानों में प्लास्टिक रिवर्स वैंडिंग मशीनों का उद्घाटन किया गया है। यह मशीनें प्लास्टिक कचरे को रिसाइकल करने में मदद करेंगी। मशीन प्लास्टिक के पैकेट/रैपर, बोतलों को क्रश करेगी। उक्त सामग्री को दोबारा से रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
खतरनाक व हानिकारक है प्लास्टिक : विशेषज्ञों की मानें तो क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक मिट्टी में हानिकारक रसायन छोड़ सकता है। इससे भूजल या आसपास के अन्य जल स्नेतों को खतरा उत्पन्न हो सकता है। प्लास्टिक के कारण गंदगी बढ़ती है, जो मच्छरों और अन्य हानिकारक कीड़े के लिए प्रजनन का आधार बन जाता है। प्लास्टिक बायोडिग्रेड नहीं होता है और वह धीरे-धीरे माइक्रो प्लास्टिक में बदल जाते हैं। सूक्ष्म प्लास्टिक जहरीले रसायन छोड़ते हैं। प्लास्टिक कचरे को जलाने से जहरीला वायु प्रदूषण होता है। प्लास्टिक के तत्वों के भोजन में मिल जाने से अस्थमा, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सिविल अस्पताल व सराभा नगर की मशीनें हुई कंडम
जानकारी के मुताबिक सिविल अस्पताल में लगाई गई दो प्लास्टिक रिवर्स वैंडिंग मशीनें चली ही नहीं। इसमें से कुछ सामान गायब हो गया। वहीं चाजिर्ग प्वाइंट तो कहीं पत्थर से इसे तोड़ दिया गया। सिविल अस्पताल में लगाई गई मशीन दो दिन भी नहीं चली और कंडम कर दी गई। वहीं गुरु नानक स्टेडियम में लगी मशीन को चाजिर्ग प्वाइंट तोड़ दिया गया परंतु अंदर से इसका बटन ही नहीं चालू किया, जिस कारण जब से मशीन लगाई गई है ऐसी ही कचरे का ढेर बनकर खड़ी है। सराभा नगर मार्कीट में पड़ी मशीन भी इसी तरह खराब हो गई है जोकि चलाई ही नहीं गई।
कूड़े का पहाड़ बनने में प्लास्टिक कचरे की मुख्य भूमिका
जानकारों की मानें तो कचरे का निस्तारण न होने के कारण ही लगातार कूड़ा के पहाड़ बढ़ता जा रहा है। इसका कारण यह भी रहा कि कूड़े में चिप्स, चॉकलेट आदि के रैपर, प्लास्टिक की बोतलें आदि का निस्तारण नहीं होने से प्लॉस्टिक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। ऐसे में लुधियाना शहर में प्लास्टिक रिवर्स वैं¨डग मशीन लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। सरकार की मंजूरी के बाद करीब 3 साल पहले स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत इस प्रोजैक्ट के तहत 41 लाख रुपए में 10 मशीनें खरीदी गई हैं, जिसमें पांच साल का रखरखाव भी शामिल था। यह मशीनें बाजार, सार्वजनिक स्थानों आदि सहित शहर के 10 सबसे व्यस्त स्थानों पर स्थापित की गईं। इसमें दो मशीनें सिविल अस्पताल, दो डीसी कार्यालय परिसर, एक ईएसआईसी अस्पताल, सराभा नगर मेन मार्कीट, माडल टाऊन गोल मार्कीट, माडल टाऊन ट्यूशन मार्कीट, गवर्नमैंट कालेज फॉर गल्र्स और गुरु नानक स्टेडियम के समीप स्थापित की गईं। शुरुआत में इनका प्रयोग हुआ लेकिन कुछ समय के बाद इनका संचालन सिर्फ खानापूर्ति के तौर पर रह गया और मशीनें पर धूल फांक रही हैं।