पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए पंजाब सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में अपनी फीस में अधिकतम 5 फीसदी तक ही बढ़ोतरी कर सकेंगे। पंजाब विधानसभा ने इससे संबंधित संशोधन विधेयक 10 अगस्त 2026 को पास किया। इससे पहले सरकार ने 13 जुलाई को अध्यादेश के जरिए यह व्यवस्था लागू की थी। पंजाब सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद अभिभावकों पर बढ़ते शिक्षा खर्च का बोझ कम करना और स्कूलों की फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।
कई तरह के शुल्क भी नियम के दायरे में
5 फीसदी की सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं रहेगी। स्कूलों की ओर से अनिवार्य रूप से लिए जाने वाले कई दूसरे शुल्क भी इसके दायरे में होंगे। इनमें डेवलपमेंट फीस, वार्षिक शुल्क, एक्टिविटी फीस, स्मार्ट क्लास और टेक्नोलॉजी चार्ज, लैब, लाइब्रेरी और परीक्षा शुल्क जैसे भुगतान शामिल हैं। कुछ परिस्थितियों में परिवहन शुल्क को भी फीस की गणना में शामिल किया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह है कि स्कूल अलग-अलग मदों में फीस बढ़ाकर कुल बढ़ोतरी को 5 फीसदी की सीमा से ऊपर न ले जा सकें।
5 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ानी है तो मंजूरी जरूरी
अगर किसी निजी स्कूल को 5 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाने की जरूरत महसूस होती है तो उसे पहले जिला स्तर की नियामक संस्था से अनुमति लेनी होगी। स्कूल को फीस बढ़ाने का कारण बताने के साथ अपनी वित्तीय जानकारी भी देनी होगी। अधिकारी यह देखेंगे कि प्रस्तावित बढ़ोतरी स्कूल के वास्तविक खर्च और विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं के हिसाब से उचित है या नहीं। जरूरत पड़ने पर स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट भी कराया जा सकता है।
पिछले तीन साल का रिकॉर्ड भी देखा जा सकेगा
नई व्यवस्था के तहत केवल आगे की फीस पर ही नजर नहीं रखी जाएगी। स्कूलों के पिछले तीन वर्षों के फीस रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। अगर इस अवधि में किसी स्कूल ने कुल फीस में 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी की है, तो अतिरिक्त वसूली की समीक्षा की जाएगी। नियमों से ज्यादा राशि लिए जाने की स्थिति में अभिभावकों को पैसा वापस करने का प्रावधान भी रखा गया है।
करीब 7,800 निजी स्कूल आएंगे दायरे में
पंजाब सरकार के अनुसार, नई फीस व्यवस्था से राज्य के करीब 7,800 निजी स्कूल प्रभावित होंगे। इन स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 32 लाख विद्यार्थियों के परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। पंजाब सरकार का कहना है कि हर नए सत्र में फीस और दूसरे जरूरी शुल्क बढ़ने से अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना इस नीति का मुख्य उद्देश्य है।
किताब और यूनिफॉर्म खरीदने की आजादी
नए नियमों के तहत स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे। स्कूल यूनिफॉर्म का रंग, डिजाइन और जरूरी मानक तय कर सकता है, लेकिन अभिभावक अपनी पसंद के विक्रेता से इसे खरीद सकेंगे। इसी तरह किताबों और पढ़ाई की सामग्री के लिए भी किसी एक दुकान या प्रकाशक से खरीदारी करने का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा। स्कूलों को कम से कम तीन दुकानों या प्रकाशकों के विकल्प देने होंगे।
नियम तोड़ने पर जुर्माना और कड़ी कार्रवाई
फीस से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने वाले निजी स्कूलों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। पहली बार नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा उल्लंघन करने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपये तक हो सकता है। लगातार या गंभीर रूप से नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ इससे भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें स्कूल की मान्यता या लाइसेंस रद्द करने तक का प्रावधान शामिल है।