चंडीगढ़: पंजाब के लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। बता दें कि पंजाब सरकार अब परिवहन विभाग में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मिली जानकारी के अनुसार, सरकार पूरे पंजाब में आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की योजना पर काम कर रही है।
आरटीओ सेवाएँ जाएँगी सेवा केंद्रों के हवाले
सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट जैसी सेवाएँ अब सीधे सेवा केंद्रों के माध्यम से प्रदान की जाएँगी। पहले भी इन केंद्रों पर कुछ आरटीओ से जुड़ी सेवाएँ मिलती थीं, लेकिन अब लगभग पूरा काम यहीं से होगा। इससे आरटीओ कार्यालयों की भूमिका सीमित होकर केवल दस्तावेज़ों की अंतिम मंज़ूरी तक रह जाएगी।
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
सरकार का यह कदम आरटीओ कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार और देरी को खत्म करने की दिशा में बताया जा रहा है। कई बार लोगों को लाइसेंस या वाहन संबंधी दस्तावेज़ों के लिए महीनों तक चक्कर काटने पड़ते थे। वहीं, दलालों और एजेंटों के ज़रिए रिश्वतखोरी के कई मामले भी सामने आए हैं। सरकार का कहना है कि यह नया सिस्टम “भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी प्रशासन” की ओर एक कदम होगा।
मुख्यमंत्री जल्द कर सकते हैं ऐलान
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इस महीने के अंत तक लुधियाना से इस योजना की औपचारिक शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर
पिछले कुछ वर्षों में आरटीओ कार्यालयों से जुड़े कई भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले सामने आए हैं। सतर्कता विभाग ने लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में कई छापेमारी कर एजेंटों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। लुधियाना के तत्कालीन आरटीओ नरिंदर सिंह धालीवाल को भी भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, जिनका मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।
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चार महीने पहले उजागर हुआ था बड़ा नेटवर्क
करीब चार महीने पहले, सतर्कता विभाग ने ड्राइविंग टेस्ट में फर्जीवाड़े और रिश्वतखोरी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। इस कार्रवाई में 42 एजेंटों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें कुछ महिला कर्मचारी भी शामिल थीं। जाँच में सामने आया कि ये एजेंट लोगों से मोटी रकम लेकर बिना टेस्ट के ड्राइविंग लाइसेंस बनवा देते थे।
जनता के लिए क्या बदल जाएगा?
अगर यह योजना लागू होती है तो लोगों को अब लंबी लाइनों और दलालों के जाल से मुक्ति मिल सकती है। सभी काम ऑनलाइन या नज़दीकी सेवा केंद्र से कराए जा सकेंगे। हालांकि, आरटीओ कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
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