चंडीगढ़: पंजाब के बुज़ुर्ग पेंशनधारकों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। लंबे समय से पेंशन बढ़ोतरी की मांग को लेकर चंडीगढ़ लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने संसद में आवाज़ बुलंद की है। उन्होंने केंद्र सरकार से साफ सवाल किया कि शहर में बुज़ुर्गों को मिलने वाली पेंशन आखिर कब बढ़ाई जाएगी।
2016 के बाद नहीं हुआ पेंशन में कोई इज़ाफा
लोकसभा में मुद्दा उठाते हुए सांसद मनीष तिवारी ने बताया कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद यहां बुज़ुर्गों की पेंशन साल 2016 से जस की तस बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चंडीगढ़ में वर्तमान में बुढ़ापा पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, जबकि पड़ोसी राज्यों में यह राशि कहीं अधिक है। पंजाब में बुज़ुर्गों को ₹1,500, वहीं हरियाणा में ₹3,000 रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है।
प्रस्ताव को लेकर केंद्र और प्रशासन में टकराव
जब इस विषय पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया, तो केंद्र की ओर से कहा गया कि चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से पेंशन बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन का दावा है कि वे लगातार इस संबंध में प्रस्ताव भेजते रहे हैं। इस आपसी विरोधाभास पर सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री से पूछा कि चंडीगढ़ में पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 कब किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री का जवाब क्या रहा?
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि यह मामला सीधे तौर पर उनके मंत्रालय के अंतर्गत नहीं आता। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से 60 से 79 वर्ष के वरिष्ठ नागरिकों को ₹200 और 80 वर्ष से अधिक उम्र वालों को ₹500 रुपये की सहायता दी जाती है। इसके अलावा पेंशन की अतिरिक्त राशि तय करना संबंधित राज्य या प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। इसलिए इस विषय पर चंडीगढ़ प्रशासन से ही जवाब लिया जाना चाहिए।
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अब बुज़ुर्गों की निगाहें फैसले पर
संसद में मुद्दा उठने के बाद एक बार फिर चंडीगढ़ के बुज़ुर्गों को उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पेंशन बढ़ोतरी पर ठोस फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, गेंद प्रशासन के पाले में है और पेंशनधारक सरकार के अगले कदम का इंतज़ार कर रहे हैं।

