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पंजाब के स्कूलों में रसोई अपग्रेड को मिली केंद्रीय सहायता, 26.57 करोड़ रुपये जारी

June 23, 2025

पंजाब के स्कूलों में रसोई अपग्रेड को मिली केंद्रीय सहायता, 26.57 करोड़ रुपये जारी

चंडीगढ़: पंजाब के सरकारी स्कूलों की रसोई व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए केंद्र ने राज्य को कुल 26.57 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया है। इस फंड का उद्देश्य स्कूलों की रसोई में उपयोग हो रहे पुराने उपकरणों को बदलना और नई आवश्यक वस्तुएं खरीदना है, जिससे मिड-डे मील की गुणवत्ता और संचालन बेहतर हो सके।

राज्य के 23 जिलों के 18,991 स्कूलों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इनमें से 214 स्कूलों में नए रसोई उपकरण खरीदे जाएंगे, जबकि 18,777 स्कूलों में पुराने उपकरण बदले जाएंगे। स्कूलों में प्रतिदिन लगभग 15.24 लाख बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है, और यह सहायता उनकी सेहत और पोषण के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

क्या-क्या मिलेगा स्कूलों को?

इस अनुदान से स्कूलों में गैस चूल्हे, एलपीजी सिलेंडर, बड़े बर्तन, पानी के ड्रम और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे या बदले जाएंगे। फंड का आवंटन स्कूलों की संख्या और स्थानीय जरूरतों के आधार पर किया गया है।

जिलेवार आवंटन में क्या रहा खास?

लुधियाना जिला इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बना है।

नवांशहर जिले को 11.35 लाख रुपये की सर्वाधिक राशि नए उपकरणों की खरीद के लिए मिली है।

वहीं संगरूर जिले को सबसे कम 10,000 रुपये की राशि प्रदान की गई है।

फरीदकोट, फाजिल्का, फिरोजपुर, जालंधर, मोगा, पटियाला, रोपड़, और एसएएस नगर सहित कुल 13 जिलों को केवल पुराने उपकरणों को बदलने के लिए फंड प्राप्त हुआ है।

शेष जिलों को दोनों प्रकार की सहायता नए उपकरणों की खरीद और पुराने के प्रतिस्थापन प्राप्त हुई है।

पारदर्शिता और निगरानी पर जोर

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आवंटित धनराशि का उपयोग समयबद्ध और नियमानुसार किया जाए। खर्च की गई राशि की प्रमाणित उपयोग रिपोर्ट अनिवार्य रूप से मुख्यालय को भेजनी होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

सर्वेक्षण बना निर्णय का आधार

इस निर्णय से पहले राज्य सरकार द्वारा एक विस्तृत सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें स्कूल रसोई में मौजूद उपकरणों की स्थिति, उपयोग और आवश्यकता का मूल्यांकन किया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र से फंड की मांग की गई और सूची के अनुसार राशि जारी की गई।

क्या कहता है शिक्षा विभाग?

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस सहायता से मिड-डे मील की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी। छात्रों को समय पर साफ, ताजा और पोषक आहार मिल सकेगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार की संभावना है।

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