पंजाब डेस्क: सिख इतिहास और धार्मिक पहचान की सुरक्षा को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने बड़ा कदम उठाया है। श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित पंज सिंह साहिबों की अहम बैठक में यह फैसला लिया गया कि सिख गुरुओं, उनके परिवारों, सिख शहीदों, योद्धाओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर बिना अनुमति कोई भी फिल्म, एनिमेशन या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वीडियो नहीं बनाया जा सकेगा।
डिजिटल युग में बढ़ी चिंता
बैठक के दौरान इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि आधुनिक तकनीक, खासकर AI के बढ़ते इस्तेमाल से सिख इतिहास और संस्कृति के गलत चित्रण का खतरा बढ़ गया है। सिंह साहिबों ने माना कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना नियंत्रण के बनाए जा रहे कंटेंट से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, इसलिए एक स्पष्ट और सख्त नीति की आवश्यकता है।
पुराने फैसलों की दोबारा पुष्टि
SGPC ने सिख इतिहास से जुड़ी फिल्मों पर पहले लिए गए फैसलों (1934, 1940, 2003, 2015 और 2022) को फिर से लागू करने की पुष्टि की है। इसके साथ ही यह साफ किया गया कि इन नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विद्वानों और पंथिक हस्तियों से हुई चर्चा
2 मई 2025 को सिख विद्वानों, बुद्धिजीवियों और पंथ से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के साथ विशेष विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में यह निष्कर्ष निकला कि बदलते तकनीकी दौर में सिख पहचान, परंपराओं, सिद्धांतों और ऐतिहासिक मूल्यों को सही और सम्मानजनक तरीके से संरक्षित करना बेहद जरूरी है।
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क्या होंगे नए नियम?
पंज सिंह साहिबों के फैसले के अनुसार, सिख गुरुओं, उनके परिजनों, सिख शहीदों और महान व्यक्तित्वों की नकल कर फिल्म, एनिमेशन या AI वीडियो बनाना प्रतिबंधित होगा। सिख इतिहास, परंपराओं या धार्मिक विषयों पर कोई भी फिल्म बनाने से पहले SGPC की औपचारिक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। SGPC देश की प्रमुख फिल्म निर्माण कंपनियों को पत्र भेजकर इन निर्देशों की जानकारी देगी।

