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शिरोमणि अकाली दल ने संगठन में किया बड़ा फेरबदल, कोर कमेटी और पदाधिकारियों की नई टीम की हुई घोषणा

June 28, 2025

शिरोमणि अकाली दल ने संगठन में किया बड़ा फेरबदल, कोर कमेटी और पदाधिकारियों की नई टीम की हुई घोषणा

SAD Announce New Team: अमृतसर: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करते हुए नई कोर कमेटी और प्रमुख पदाधिकारियों की घोषणा की है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस सूची का औपचारिक अनावरण किया, जिसमें कई पुराने चेहरों के साथ-साथ कुछ नए नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को भी कोर कमेटी में स्थान दिया गया है, जिससे पार्टी के रुख और रणनीति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

-संगठन के नए चेहरे

घोषणा के मुताबिक, बलविंदर सिंह भूंदड़ को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ. दलजीत सिंह चीमा सचिव और एनके शर्मा को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के युवा और महिला मोर्चों में भी नए नेतृत्व को मौका दिया गया है।

सरबजीत सिंह झिंजर को युवा अकाली दल का अध्यक्ष

बीबी हरगोबिंद कौर को महिला अकाली दल की कमान

रणबीर सिंह राणा को एसओआई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

-कोर कमेटी में शामिल दिग्गज

31 सदस्यों की नई कोर कमेटी में कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। इनमें शामिल हैं:

बलविंदर सिंह भूंदड़, हरजिंदर सिंह धामी, नरेश गुजराल, परमजीत सिंह सरना, हीरा सिंह गाबड़िया, बीबी हरसिमरत कौर बादल, और अन्य प्रमुख नेता। बिक्रम मजीठिया का नाम भी इसी सूची में शामिल है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

-पदेन सदस्य भी बनाए गए

कोर कमेटी में 5 पदेन सदस्यों को भी जोड़ा गया है, जो संगठन के विभिन्न मोर्चों का नेतृत्व कर रहे हैं। इनमें हरचरण सिंह बैंस (मीडिया प्रमुख), सरबजीत सिंह झिंजर (युवा अकाली दल), बीबी हरगोबिंद कौर (महिला अकाली दल), रणबीर सिंह राणा (एसओआई), और अर्शदीप सिंह कलेर (मुख्य प्रवक्ता) शामिल हैं।

-नई टीम से उम्मीदें और रणनीति

सुखबीर सिंह बादल ने इस बदलाव को पार्टी के “पुनर्गठन और मजबूती की दिशा में एक निर्णायक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर फिर से जुड़ने और युवाओं को नेतृत्व में शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। मजीठिया को शामिल किए जाने पर उन्होंने टिप्पणी नहीं की, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्र इसे “राजनीतिक मजबूरी और वफादारी का सम्मान” बता रहे हैं।

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