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सिख एकता पंथ की सबसे बड़ी ताकत : ज्ञानी कुलदीप सिंह

Sikh unity is a major strength of the Panth : अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुए मीरी-पीरी खालसा मार्च का दूसरा चरण आज गुरुद्वारा चूले बाबा आला सिंह जी लोंगोवाल से पंथिक परंपराओं के साथ अपने अगले पड़ाव, गांव गागा स्थित गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं के लिए रवाना हुआ। खालसा मार्च के रवाना होने के समय श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज, SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी टेक सिंह और श्री दरबार साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी राजदीप सिंह समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं। खालसा मार्च के रवाना होने के बाद, बंदी सिखों की रिहाई और ‘चढ़दी कला’ (उच्च मनोबल) के लिए गुरुद्वारा चूले बाबा आला सिंह जी में श्री अखंड पाठ साहिब शुरू किया गया, जिसके लिए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने अरदास की। इस मौके पर सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी राजदीप सिंह ने संगत को इतिहास और कहानियां सुनाईं और उन्हें गुरमत के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। मुख्य प्रचारक भाई सरबजीत सिंह धोतियां ने रवानगी की अरदास की, जिसके बाद ज्ञानी राजदीप सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप को पालकी में सुशोभित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि गुरु साहिब ने हमें एक परिवार बनाया है और हमारा पंथिक भविष्य भी साझा है। बाबा आला सिंह का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जीवन हमें सिखाता है कि चाहे हालात कैसे भी हों, जब पंथ के हितों की बात आती है, तो एक सिख को मज़बूती से खड़ा रहना चाहिए। मिसलों के इतिहास के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय चाहे कितने भी मतभेद क्यों न रहे हों, जब पंथ के बड़े हितों की बात आई, तो सभी मिसलें एक झंडे के नीचे एकजुट हो गईं। पंथ की इसी एकता ने नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली जैसी ताकतों का मुक़ाबला किया। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने भी अलग-अलग सिख ताकतों को एकजुट करके एक मज़बूत सिख राज्य की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि यह इतिहास हमारे लिए प्रेरणा है कि ताकत बड़ी होने में नहीं, बल्कि एकजुट होने में है। आज, जब सिख समुदाय पर सैद्धांतिक रूप से पंथ-विरोधी ताकतों द्वारा हमले किए जा रहे हैं, तो समय की मांग है कि हम अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर पंथ के हितों के लिए एकजुट हों। आज सिख समाज में तलाक के बढ़ते मामलों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपने पूर्वजों के इतिहास से प्रेरणा लेने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि बाबा आला सिंह और बीबी फतेह कौर का जीवन पति-पत्नी के रिश्ते की एक मिसाल है, जिसमें सुख-दुख, मुश्किल और आसान समय में जीवन की ज़िम्मेदारियों को मिलकर निभाया जाता है। इस बीच, SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने आज कहा कि पंथ-विरोधी ताकतें लगातार सिख सिद्धांतों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह समझना बहुत ज़रूरी है कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और इसके सिद्धांतों को मज़बूत करना और उनका प्रचार करना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज हमारे युवाओं को सिख धर्म से दूर करने की भी कोशिशें हो रही हैं। यह बहुत चिंता की बात है कि पंजाब के युवा, जो गुरुओं के नाम पर जीते हैं, वे नशे की लत की ओर बढ़ रहे हैं। एडवोकेट धामी ने कहा कि कई परिवारों के युवा बेटे नशे का शिकार हो गए हैं और बेबस माता-पिता आँसू बहा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुए ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ का मकसद सिख सिद्धांतों का प्रचार करना है और साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने और गुरमत के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। इस बीच, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी टेक सिंह ने भी संगत के साथ गुरमत के विचार साझा किए। Also Read :
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