Strict Ban on Stubble Burning Till November 16 : बठिंडा। धान की कटाई के दौरान प्रदूषण और आग की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त आदेश जारी किए हैं। जिला मजिस्ट्रेट राजेश धीमान ने शाम 6 बजे से अगले दिन सुबह 10 बजे तक कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही पराली और फसल अवशेष जलाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। ये आदेश 16 नवंबर 2026 तक लागू रहेंगे। नियमों का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इन आदेशों के तहत, बठिंडा ज़िले की सीमा के भीतर शाम 6:00 बजे से अगले दिन सुबह 10:00 बजे के बीच कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, ज़िला मजिस्ट्रेट ने कटाई के बाद खेतों में बची धान की पराली, भूसे या फसल के अवशेषों को जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। ज़िला मजिस्ट्रेट ने कहा कि इन अवशेषों को जलाने से मिट्टी में मौजूद फायदेमंद जैविक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है।
धान की पराली या फसल के अवशेष जलाने से आग लग सकती है, जिससे आस-पास के खेतों में खड़ी फसल और गोदामों में रखा अनाज खराब हो सकता है। यहाँ तक कि गोला-बारूद डिपो में भी आग लग सकती है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है; साथ ही, इसका पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा इससे निकलने वाला धुआँ हवा को प्रदूषित करता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए, धान की पराली और फसल के अवशेष जलाने पर रोक लगाई गई है। ये आदेश 16 नवंबर, 2026 तक लागू रहेंगे।
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