फरीदकोट : धान के आगामी सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए फरीदकोट जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू किया है। प्रशासन ने 2026-27 के धान सीजन के दौरान खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को शून्य तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
डिप्टी कमिश्नर एवं जिला मजिस्ट्रेट राहुल चाबा ने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक और आधुनिक तरीकों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग को गांव स्तर तक जागरूकता अभियान चलाने और किसानों को उपलब्ध मशीनरी का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगरानी के लिए बनाई गईं समितियां
जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम और निगरानी के लिए जिला तथा उपमंडल स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में अधिकारियों की तैनाती कर खेतों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई किसान प्रतिबंध के बावजूद पराली जलाता हुआ पाया जाता है, तो संबंधित क्लस्टर अधिकारी नियमानुसार चालान की कार्रवाई करेंगे।
धार्मिक स्थलों और स्कूलों से भी चलेगा जागरूकता अभियान
प्रशासन की ओर से लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों के माध्यम से भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों के विद्यार्थियों को भी अभियान से जोड़ने की योजना है, ताकि वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर सकें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किसानों और कृषि समितियों को पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराई गई है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसानों को जरूरत के समय मशीनरी आसानी से उपलब्ध हो सके।
रिमोट सेंसिंग से होगी निगरानी
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यकारी अभियंता रिमोट सेंसिंग सेंटर की मदद से पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी करेंगे। इसके अलावा प्रत्येक क्लस्टर के लिए एक सहायक क्लस्टर अधिकारी और दो नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। कृषि विभाग को गांववार योजना तैयार करने और उपलब्ध पराली प्रबंधन मशीनरी का उचित समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को फसल अवशेषों के निपटारे में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
किसानों से सहयोग की अपील
राहुल चाबा ने जिले के किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को खेतों में आग लगाने के बजाय वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीकों से प्रबंधित करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन के प्रयास तभी सफल होंगे, जब किसान और समाज के अन्य वर्ग भी इसमें सक्रिय भागीदारी करें।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है और बच्चों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं सहित संवेदनशील लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हवा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाकर फरीदकोट को पराली जलाने की घटनाओं से मुक्त बनाने के अभियान में सहयोग करें।

