लुधियाना: शहर के चौक-चौराहों व सार्वजनिक स्थलों से जिला प्रशासन की टीम ने छह बच्चों को भीख मांगते हुए पकड़ा था और सिविल अस्पताल में डीएनए टैस्ट करवाकर उन्हें हैवनली बाल घर में भेज दिया। बच्चे छोटे थे ऐसे में उन्हें बिना मां के रखना संभव नहीं था तो प्रशासन ने कुछ बच्चों की माताओं को भी वहीं रख लिया। डीएनए सैंपल लिए दो महीने के करीब समय बीत गया लेकिन अभी तक बच्चों की डीएनए रिपोर्ट नहीं आई। जिला प्रशासन डीएनए रिपोर्ट के लिए लगातार फॉरेंसिक लैब खरड़ से संपर्क साध रहा है। फॉरेंसिक रिपोर्ट के आने पर ही जिला प्रशासन बच्चों को रिलीज करने या उनके पुनर्वास के संबंध में फैसला ले सकेगा।
प्रशासन की टीम ने 23 जुलाई को अलग-अलग जगहों पर रेड करके 6 बच्चों को भीख मांगते हुए पकड़ा था और उनका सिविल अस्पताल में डीएनए टैस्ट करवाया। प्रशासन को शक है कि कुछ शरारती तत्व लोगों के बच्चों को उठाकर लाते हैं और उनसे भीख मंगवाते हैं या उनकी आड़ में खुद भीख मांगते हैं। प्रशासन ने भारत नगर चौक, पुरानी कचहरी चौक, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत अलग-अलग इलाकों में रेड करके भीख मांगने वाले बच्चों के साथ-साथ उन्हें भी पकड़ा था, जिनके साथ ये बच्चे भीख मांग रहे थे। प्रशासन ने पकड़ने के बाद बच्चों व उनको लेकर आने वालों के डीएनए सैंपल लिए ताकि उनका मिलान किया जा सके। प्रशासन ने बच्चों को तो बाल घर में भेज दिया जबकि उनको साथ लोने वालों को छोड़ दिया।
कुछ बच्चे बहुत छोटे हैं तो उनकी माताओं को भी वहीं पर रखा है ताकि उनकी देखभाल सही से हो सके। जानकारी के अनुसार कुछ बच्चों के परिजन प्रशासन के पास आ रहे हैं और उनसे अपने बच्चों को वापस मांग रहे हैं। प्रशासन की मजबूरी यह है कि जब तक बच्चों की डीएनए रिपोर्ट नहीं आती तब तक वो बच्चों को किसी और के हवाले नहीं कर सकते हैं। डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड राइट प्रोटैक्शन अफसर रश्मि सैनी ने बताया कि जिन बच्चों के डीएनए सैंपल लिए थे उन्हें बाल घर में रखा गया है। उन्होंने बताया कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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