Air Force: देशद्रोह जैसा अपराध करने के मामले में बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए डीसी फिरोजपुर को लताड़ लगाई। यहां बताने लायक है कि दैनिक सवेरा ने हाल ही में एक बेहद चौंकाने वाली खबर प्रकाशित की थी, जिसमे बताया गया था कि कैसे कुछ सरकारी अधिकारियों ने लालचवश वायुसेना की 100 साल पुरानी हवाई पट्टी को ही जालसाजी करते हुए बेच दिया और फिरोजपुर के रैवेन्यू अधिकारियों से लेकर उच्च-स्तर पर कार्यरत रहे आईएएस अधिकारियों के साथ ही इसका सीधे तौर पर संबध है। 28 साल पुराने इस मामले में वायुसेना द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज करवाने के बावजूद आज तक इस मामले में दोषियों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की गई है।
4 हफ्ते के अंदर-अंदर कंप्लायंस रिपोर्ट कोर्ट में देनी होगी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि देश की रक्षा से संबधित मामले में दिखाई गई चौंकाने वाली लापरवाही अक्षम्य है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की संप्रुभता की रक्षा करना जिस सेना के जिम्मे है। उनको इस मामले की पड़ताल के लिए राज्यपाल के पास जाना पड़ा। हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्प्णी करते हुए कहा कि डीसी फिरोजपुर की तरफ से इस तरह का लापरवाही भरा व्यवहार एक कारण बन सकता है, जो भारत के नागरिकों के जीवन और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डाल देगा। हालांकि हम सैनिकों की सक्रिय रूप से सहायता करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। लेकिन, नौकरशाही से कम से कम यह अपेक्षा की जा सकती है कि वह उनके लिए अनुचित बाधाएं उत्पन्न न करे। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों का भली-भांती से अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच चीफ डायरैक्टर विजीलैंस ब्यूरो के पास सौंपने का आदेश जारी करते हुए कहा कि वह इस पूरे मामले की निजी तौर पर जांच करें ओर अगर ठीक लगे तो इसके ऊपर बनती कार्रवाई को भी अंजाम देते हुए 4 हफ्ते के अंदर-अंदर अपनी कंप्लायंस रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट करें।

रिटायर्ड कानूनगो ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
फिरोजपुर के रिटायर्ड कानूनगो निशान सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसमें, उन्होंने गुहार लगाई थी कि फिरोजपुर जोकि बार्डर एरिया है और हर समय दुश्मन ताकतों से खतरा मंडराता रहता है। वहां जहाज ग्राऊंड नाम से काफी मश्हूर एक वायुसेना की जमीन है। जिसके बीचो-बीच एक बहुत पुरानी हवाई पट्टी भी बनी हुई है। हालांकि इसका इस्तेमाल रूटीन में नहीं किया जाता। मगर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से यह काफी महत्वपूर्ण हवाई-पट्टी है। जिसकी कुछ लालची किस्म के अधिकारियों ने मिलीभगत करके जालसाजी से रजिस्ट्री करवा ली। वायुसेना की तरफ से कई बार डीसी फिरोजपुर से लेकर कई अन्य अधिकारियों के पास शिकायत की गई। मगर किसी ने भी कोई कार्रवाई करना मुनासिब न समझा। वायुसेना ने 24 फरवरी, 2024 को राज्यपाल के पास भी एक पत्र लिखकर इस मामले में बनती कारवाई के लिए लिखा था। साल 1997 में 5 जाली सेल-डीड नं 889, 965, 1002, 1104 और 1177 गैरकानूनी और फर्जीवाड़ा करके रजिस्टर की गई थी। जिनका बाद में जालसाजी करते हुए इंतकाल तक दर्ज कर दिया गया था। यह जगह दरअसल 1937-38 से ही भारतीय वायुसेना के कब्जे में रही और 118.06 कनाल वाली हवाई-पट्टी वायुसेना की 982 एकड़ की पूरी भूमि का ही एक हिस्सा है। इस जमीन पर एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है और देश की सुरक्षा के लिहाज से भारत-पाक सीमा के साथ लगती इस जगह को किसी भी कीमत पर बेचा ही नहीं जा सकता। इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के लिए याचिका दायर की गई थी।
गोपनीय हवाई पट्टी को सार्वजनिक करके देश की सुरक्षा के साथ किया गया खिलवाड़ : एडवोकेट पीयूष गगनेजा
सीनियर एडवोकेट पीयूष गगनेजा ने दैनिक सवेरा से कहा कि हाईकोर्ट ने देश की सुरक्षा के साथ सीधे तौर पर जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में काफी सख्ती बरतते हुए डीसी फिरोजपुर के लापरवही भरे रवैये को लेकर रोष जताया और चीफ डायरैक्टर विजीलैंस ब्यूरो को भी इस मामले में एक पक्ष बनाते हुए 4 हफ्ते के अंदर पड़ताल एवं कारवाई करने का आदेश जारी किया है। एडवोकेट पीयूष ने कहा कि केवल जालसाजी करके जमीन खरीदने वालों पर कार्रवाई के लिए कहा गया और वह भी नहीं की गई। जबकि 28 साल तक रैवेन्यू अधिकारी कैसे सेना की जमीन की रैवेन्यू रिकार्ड में गलत गिरदावरी करते रहे। इससे साफ पता लगता है कि रैवेन्यू अधिकारियों की मिलीभगत के साथ ही सेना की इस सामरिक महत्व वाली जमीन को न केवल फर्जीवाड़ा करके बेचा गया। बल्कि साथ ही साथ जो बात बेहद गोपनीय थी और इस हवाई पट्टी का किसी को पता नहीं था। उसे इस तरह से सार्वजनिक करके देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है।
रैवेन्यू रिकार्ड में की जा चुकी है दुरुस्ती, सरकार के पास भी भेजी है विस्तृत रिपोर्ट, प्रशासन सेना को पूर्ण सहयोग देने को वचनबद्ध: डीसी
डीसी फिरोजपुर दीपशिखा शर्मा ने दैनिक सवेरा से विशेष बातचीत में कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही रैवेन्यू रिकार्ड की दुरुस्ती की जा चुकी है। जिस हवाई पट्टी को गलत ढंग से बेचा गया था, वह दोबारा से सेना के नाम पर चढ़ चुकी है। इतना ही नहीं, हमारी तरफ से 35-36 पन्नों की एक बेहद विस्तृत रिपोर्ट भी प्रदेश सरकार के पास भेजी जा चुकी है। जिसमें, शुरू से लेकर अब तक के सभी एक्शन की पूरी डिटेल दी गई है। इसके इलावा हम 4-5 बार एसएसपी फिरोजपुर को लिख चुके हैं कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। डीसी ने कहा कि प्रशासन सेना के हर हाल मे पूर्ण सहयोग प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है।