Last Updated: November 5, 2026

Dainik Savera Times Logo

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब का फलसफा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आज भी प्रासंगिक : कुलदीप धालीवाल

November 25, 2025

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब का फलसफा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आज भी प्रासंगिक : कुलदीप धालीवाल

अजनाला : आज विधायक और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्नी सरदार कुलदीप सिंह धालीवाल ने नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की चरण-छोह प्राप्त और खालसा पंथ की स्थापना-स्थली श्री आनंदपुर साहिब में, मुख्यमंत्नी पंजाब श्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में सरकार द्वारा आयोजित पंजाब विधानसभा के विशेष सत्न के दौरान, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की अद्वितीय शहादत को नमन किया और कहा कि गुरु जी का जीवन-दर्शन और शिक्षाएं आज भी संपूर्ण मानवता के लिए समान रूप से प्रासंगिक हैं।

धालीवाल ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित अमर शहीद बाबा जीवन सिंह जी (भाई जैता जी) स्मृति हाल में हुए विशेष विधानसभा सत्र को संबोधित करते हुए, सत्र में उपस्थित मुख्यमंत्नी पंजाब, सभी कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और दर्शक दीर्घा में मौजूद प्रमुख हस्तियों के साथ यह जानकारी साझा की कि उनके (धालीवाल) विधानसभा हलके में स्थित ऐतिहासिक गाँव घुक्केवाली (गुरु का बाग) में, मानवाधिकारों, धार्मिक स्वतंत्नता और सत्य के अधिकार की रक्षा के लिए अद्वितीय कुर्बानी देने वाले श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने 9 महीने, 9 दिन और 9 घड़ियां निरंतर निवास किया और पर्यावरण की शुद्धता के लिए अपने हाथों से पीपलों के पौधों सहित विभिन्न प्रकार के पौधों का बाग लगाया।

उन्होंने बताया कि अपने निवास काल के दौरान गुरु जी ने संगत को श्री गुरु नानक देव जी के सच्चे-शुद्ध फ़लसफ़े से जोड़ने, उस समय के हाकिमों द्वारा किसानों की उपज का आधा हिस्सा ज़बरी कर के रूप में वसूले जाने, मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा औरंगज़ेब के ज़ुल्म के विरुद्ध और धार्मिक स्वतंत्नता के लिए जागरूक किया। वहीं सिख इतिहास के अमर शहीद बाबा जीवन सिंह जी (भाई जैता जी) का जन्मस्थान अजनाला हलके के ऐतिहासिक गांव गग्गोमाहल में है। उन्होंने मुख्यमंत्नी पंजाब श्री भगवंत सिंह मान का अजनाला हलके में गुरु जी की चरण-छोह प्राप्त ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का बाग के बहुपक्षीय विकास हेतु 50 लाख रुपए की राशि मंजूर करने के लिए विशेष धन्यवाद किया।

विशेष सत्र में अपने संबोधन को जारी रखते हुए धालीवाल ने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना-स्थली और गुरु जी की चरण-छोह प्राप्त भूमि श्री आनंदपुर साहिब से सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि पृथ्वी के किसी भी कोने में यदि मानवाधिकारों का हनन और ज़ुल्म का दुर्भाग्यपूर्ण व्यवहार हो रहा हो, तो उसका डटकर विरोध करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी पंजाब विभिन्न प्रकार के भेदभाव और अत्याचार का सामना कर रहा है।

अपनी व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब पंजाब में ‘‘काले दिनों’’ का दौर चरम पर था, तब उन्होंने (धालीवाल) परिवार सहित गुरु जी के जीवन-फ़लसफ़े से मिली प्रेरणा पर अमल करते हुए, गुरुद्वारा गुरु का बाग (गुरु जी की चरण-छोह प्राप्त स्थान) से मात्न डेढ़ किलोमीटर दूर अपने पैतृक गांव जगदेव कलां में रहते हुए काली ताकतों का डटकर मुकाबला किया, चाहे इस दौरान उनके बड़े भाई और बहनोई को अपने प्राणों की आहुति ही क्यों न देनी पड़ी।

ये भी पढ़ें- Amalaki Ekadashi 2026: आंवले के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है? जानिए आदि वृक्ष से जुड़ी मान्यताएं

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें