
इसके अलावा 5 नवंबर को वित्त मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले दिरबा में एक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ‘पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब’ ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज करने की घोषणा की है। लुधियाना के इसरू भवन में यूनियन की राज्य स्तरीय बैठक हुई, जिसमें पूरे राज्य के डिपो के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान, यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा न करने पर नाराजगी जताई और आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया।
बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल और संस्थापक कमल कुमार ने बताया कि 29 अक्टूबर को हुई एक बैठक में—जिसमें परिवहन मंत्री, कार्मिक, वित्त और गृह विभागों के प्रतिनिधि तथा विभागीय प्रबंधन शामिल थे—कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए थे। सरकार ने पनबस के अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सेवा नियमों को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने का वादा किया था। इसके अलावा, 14 अगस्त 2026 के अधिनियम/बिल के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध कर्मचारियों के दर्जे में लाने के लिए दो दिन का समय तय किया गया था, लेकिन, आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने आगे बताया कि आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने और नए भर्ती हुए कर्मचारियों को अनुबंध शर्तों के दायरे में शामिल करने पर भी विचार करने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, सरकार ने इन मांगों को लागू करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। इस मौके पर राज्य महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों, जगजीत सिंह लिबरा, रोही राम और जोध सिंह ने कहा कि बार-बार बैठकें होने और आश्वासन मिलने के बावजूद सरकार द्वारा मांगों को पूरा न करना कर्मचारियों के साथ धोखा है। उन्होंने घोषणा की कि 5 नवंबर को वित्त मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले दिरबा में ‘ठेका मुलाज़म संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके अलावा, 8 नवंबर से पंजाब सरकार की राजनीतिक रैलियों का विरोध किया जाएगा, और 10 नवंबर को पूरे पंजाब में सभी ट्रांसपोर्ट डिपो के सामने ‘गेट रैलियां’ निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि 16 नवंबर से तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल शुरू होगी। अगर सरकार फिर भी उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है, तो मुख्यमंत्री या परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा, और ज़रूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। राज्य के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की, बलजिंदर सिंह और जालौर सिंह ने कहा कि कर्मचारी अब सरकार के आश्वासनों के बहकावे में नहीं आएंगे।